Unspoken Bond Part 1 : लेक्चर हॉल की टेंशन

Welcome to my story blog!

This is Part 1 of an original Hindi  story, titled:

Unspoken Bond

Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.

If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.

Thank you for reading, and feel free to share your thoughts in the comments.


Part 1 – लेक्चर हॉल की टेंशन

Dilshan कॉलेज में फर्स्ट इयर का स्टूडेंट था।
लेक्चर हॉल में जब भी प्रोफेसर सवाल पूछते, उसकी धड़कनें तेज़ हो जातीं।
वह किताबों में अच्छा था, लेकिन सामने बोलने में हमेशा अटक जाता।
बाक़ी स्टूडेंट्स उसे introvert मानते,
पर उसकी सबसे अच्छी दोस्त Lata कभी भी उसे अकेला नहीं छोड़ती।

Lata (हँसते हुए):
“अरे महाराज! सवाल सुनते ही क्यों लगता है जैसे तुम्हारे दिमाग़ का server down हो गया?
थोड़ा refresh मार, answer अपने-आप upload हो जाएगा।”

क्लास ठहाकों से गूंज उठती और Dilshan शर्म से लाल हो जाता।
उसे लगता Lata बस उसका मज़ाक उड़ाती है,
लेकिन सच ये था कि Lata उसके डर को हल्का करने की कोशिश करती थी।




कैंटीन और दोस्ती

कैंटीन में उनकी reserved टेबल थी।
जहाँ Lata हमेशा चाय के साथ उसकी टांग खींचती रहती—

Lata:
“देख, अगली बार presentation में अगर तूने आवाज़ धीमी की न,
तो मैं mike पकड़कर खुद repeat कर दूँगी तेरी line।
लोग सोचेंगे—Dilshan ने playback singer रख लिया है।”

Dilshan (गुस्से में):
“यार, तू serious क्यों नहीं रहती कभी?”

Lata (फिलॉसॉफिकल अंदाज़ में, चाय घूंटते हुए):
“क्योंकि serious होने का काम already Prof लोग कर रहे हैं।
अगर मैं भी serious हो गई तो तेरे जैसे लोग घबराहट से ICU पहुँच जाओगे।”

Dilshan बाहर से नाराज़ होता,
लेकिन अंदर से उसे Lata की मौजूदगी हमेशा confidence देती थी।



The Corridor Challenge

क्लास ख़त्म होते ही प्रोफेसर ने casually कहा –
“Next week का छोटा-सा surprise viva होगा, सबको prepare रहना है।”

Dilshan के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
वो धीरे-धीरे corridor में जा रहा था, मानो सोच रहा हो कि काश invisible हो जाए।

Lata ने उसका चेहरा देखा और हँस पड़ी।

Lata:
“भाई, ऐसे क्यों चल रहा है जैसे अभी-अभी तुम्हें death warrant मिल गया हो?
Relax! Viva कोई execution नहीं है… बस question-answer की badminton है।”

Dilshan (नाराज़ होकर):
“तुझे मज़ाक लग रहा है न? Viva में सवाल direct पूछते हैं, और अगर मैं चुप हो गया तो?”

Lata ने उसका बैग खींचकर कहा:
“अगर तू चुप रहा, तो मैं Prof से कह दूँगी—
‘Sir, Dilshan silent mode पर है। वो words बचाकर environment friendly speech दे रहा है।’”

Dilshan ने पहली बार corridor में हँसते हुए reply किया।
वो समझने लगा कि Lata की मज़ाकिया बातों के पीछे हमेशा एक छुपा हुआ confidence booster होता है।



Late-Night Prep

कॉलेज में inter-college presentation competition announce हुआ।
Dilshan का नाम final list में था।

कैंपस लाइब्रेरी में late-night group study होती,
बाक़ी दोस्त आधे घंटे में निकल जाते,
लेकिन Lata उसके साथ देर रात तक बैठती।

Lata (कॉफी का घूंट लेते हुए):
“देख, content तेरा strong है। बस बोलने की practice चाहिए। चल, मुझे सुनाकर बोल।”

Dilshan (हिचकिचाते हुए):
“अगर मैं फिर से अटक गया तो?”

Lata (funny-philosophical अंदाज़ में):
“अटकना भी ज़रूरी है। गाड़ी बिना brake के सीधा accident कर देती है।
Speech में भी pauses चाहिए, audience तभी जागी रहती है।”

Dilshan हल्की हँसी के साथ practice करने लगा।
वो धीरे-धीरे confident बनने लगा।



The Rainy Evening

एक दिन library से निकलते वक्त तेज़ बारिश शुरू हो गई।
दोनों छतरी के बिना फँस गए।

Lata ने हाथ फैलाकर कहा:
“कभी-कभी न, life presentation जैसी होती है—unexpected और थोड़ी messy।
लेकिन मज़ा इसी में है।”

Dilshan (धीरे से):
“तू तो हर चीज़ में philosophy ढूँढ लेती है।”

Lata (हँसते हुए):
“और तू हर चीज़ में डर।
देख, अगर तू डरना बंद कर दे और मैं philosophy छोड़ दूँ,
तो हमारी दोस्ती भी बेरंग हो जाएगी।”

बारिश की बूंदों में वो दोनों कुछ देर चुप खड़े रहे।
Dilshan को अचानक लगा—Lata सिर्फ दोस्त नहीं, उसकी हिम्मत है।




[जारी है…]

Stay tuned for Part 2 of "Unspoken Bond" —
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।

❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।

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