Twaif Chapter 1: The Jungle Night

 Welcome to my story blog!

This is Part 1 of an original Hindi story, titled:

Twaif

Told in weekly parts, this story explores horror, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.

If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.

Thank you for reading. Feel free to share your thoughts in the comments.


🌙 Twaif

Chapter 1: The Jungle Night

साल 1895।
बरसात की रात थी।

घना जंगल, भीगी मिट्टी की खुशबू, टपकती बूंदों की लय और दूर कहीं जंगली जानवर की हल्की-सी आवाज़।




Devans अकेला अपनी लालटेन लिए कच्ची सड़क पर चल रहा था।
थका हुआ, कपड़े भीग चुके थे, और मन बस गाँव पहुँचने की जल्दी में था।




तभी अचानक, अंधेरे में कुछ परछाइयाँ उभरीं।
काले कपड़ों में, आँखों में नफ़रत की चमक लिए चार-पाँच लुटेरे उसके सामने आ खड़े हुए।
हाथों में लाठियाँ और चमकते चाकू।




जो भी है, निकाल!
उनकी आवाज़ जंगल की खामोशी चीरती चली गई।

Devans काँपते हाथों से जेब से पैसे निकालकर आगे बढ़ा देता है।
लेकिन वो रकम उनके गुस्से को और भड़काती है।

हमसे मज़ाक करता है?

अगले ही पल लाठियाँ और चाकू उस पर बरसने लगे।
कुछ ही पलों में Devans ज़मीन पर पड़ा था—लहूलुहान, अधमरा।
खून बारिश की बूँदों में मिलकर मिट्टी में समा रहा था।
आँखें धीरे-धीरे बंद हो रही थीं…




आधी रात का अंधेरा।
जंगल के हर कोने में सन्नाटा पसरा था।
सिर्फ झींगुरों की आवाज़ और पत्तों पर टपकती बारिश का संगीत।

Devans का शरीर ज़मीन पर निश्चल पड़ा था।
लेकिन तभी…

पायल की बहुत हल्की छनक — जैसे किसी और दुनिया की आवाज़ — उसके कानों तक पहुँची।
वो आवाज़ पास आती गई।

और फिर…
एक सफ़ेद साड़ी में लिपटी औरत उसके सामने थी।
उसका चेहरा चाँदनी से भी उजला,
आँखें गहरी, बड़ी — जिनमें मासूमियत भी थी और कोई अनकहा रहस्य भी।
इतनी मोहक कि उस क्षण अगर कोई दर्द देखे तो भूल जाए।

वो थी — Aarvi।



वो झुककर उसकी नब्ज़ टटोलती है,
फिर हल्की मुस्कान के साथ कहती है —

तू अभी मरा नहीं है…

Devans आधे होश में था, लेकिन उसकी आँखें Aarvi के चेहरे से हट ही नहीं रहीं।
उसे लगा मानो फ़रिश्ता आकर उसकी जान बचा रहा हो।



Aarvi ने उसे सँभाला और अपने छोटे-से घर ले आई।
घर में जलते दीये, हल्की खुशबू और चारों ओर एक अजीब-सी शांति।

सात दिनों तक Aarvi ने उसकी सेवा की।
कभी दवा पिलाती, कभी खाना खिलाती, कभी उसके सिर पर हाथ फेर देती।
हर बार उसकी छुअन में Devans को एक ठंडी हवा-सी राहत मिलती।

और इन सात दिनों में…
एक बार भी उसके मन में यह शक नहीं आया कि Aarvi शायद इंसान नहीं है।




Devans अब चलने-फिरने लायक हो गया था।
लेकिन Aarvi फिर भी उसे अकेला कुछ भी करने नहीं देती।

तू अभी कमज़ोर है… आराम कर,
वो कहती और मुस्कुराती।

उस मुस्कान में कुछ ऐसा था कि Devans बस उसे देखता ही रह जाता।
दिन धीरे-धीरे गुजरने लगे।
रातें और भी लंबी लगने लगीं।

कभी Aarvi दीये की लौ के पास बैठी रहती,
और उसकी आँखें इतनी गहरी लगतीं कि Devans उनमें डूब जाए।



कभी वह उसे नदी किनारे ले जाती —
जहाँ चाँदनी में उसका चेहरा पानी पर झलकता,
लेकिन अजीब बात यह थी कि कभी वो झलक साफ होती,
कभी अचानक धुंधली।




एक रात Devans ने हिम्मत जुटाकर पूछा —

Aarvi… तुम यहाँ अकेली क्यों रहती हो?
तुम्हारा कोई परिवार नहीं?

Aarvi कुछ क्षण चुप रही।
उसकी आँखों में नमी तैर आई।
धीरे से बोली —

कुछ रिश्ते… बस यादों में रह जाते हैं।
अब मेरा कोई नहीं है।


 

उसकी आवाज़ धीमी थी, लेकिन उसमें इतनी गहराई थी
कि Devans का दिल पिघल गया।

उस पल उसने पहली बार महसूस किया कि Aarvi सिर्फ उसकी मददगार नहीं,
बल्कि उसके दिल की गहराइयों में जगह बना चुकी थी।

धीरे-धीरे Devans के भीतर एक अजीब-सा खिंचाव पनपने लगा।
अब उसे Aarvi को खोने का डर सताने लगा था…




जैसा  की हम देख सकते हैं Aarvi कोई Normal लड़की नहीं , क्या अगले पार्ट में Devans, Aarvi का सच जान पायेगा ??

👉[जारी है…]

Stay tuned for Part 2 of "Twaif" —
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।

❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।

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