Dosti (दोस्ती ) Part -1 : बचपन की दोस्ती

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This is the beginning of an original Hindi love story, titled:

Dosti (दोस्ती )

Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love &  caring, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.

If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.

This is Part One. Thank you for reading, and feel free to share your thoughts in the comments.

Dosti (दोस्ती )

Part 1: बचपन की दोस्ती

गाँव की संकरी गलियों में धूल उड़ाते, खिलखिलाते हुए दौड़ती दो नन्हीं परछाइयाँ रोज़ एक ही मोड़ पर आकर ठहर जाती थीं। उस मोड़ ने न जाने कितनी हँसी, कितने राज़ और अनगिनत यादों को अपने भीतर समेट रखा था।

उनमें से एक थी Rekha—शांत स्वभाव की, समझदार, जिम्मेदार और पढ़ाई में हमेशा सबसे आगे रहने वाली।

दूसरी थी Radha—चंचल, नटखट, बेफिक्र और खेल-कूद की ऐसी दीवानी, जिसे किताबों से ज़्यादा मैदान की मिट्टी पसंद थी।


दोनों की पहली मुलाक़ात ही ऐसी थी मानो किस्मत ने बरसों पहले उनकी दोस्ती लिख दी हो। धीरे-धीरे उनका रिश्ता इतना गहरा हो गया कि लोग उन्हें दो शरीर और एक जान कहने लगे।

स्कूल में जब भी Radha अपनी किसी शरारत की वजह से टीचर की डाँट का शिकार होती, Rekha बिना एक पल सोचे उसके सामने ढाल बनकर खड़ी हो जाती।

"मैडम... Radha से गलती हो गई। वो आगे से ऐसा नहीं करेगी।"

Rekha की मासूम आवाज़ सुनकर कई बार टीचर का गुस्सा भी शांत हो जाता।

Radha तुरंत मुस्कुराकर कहती—

"देखा? मेरी Rekha तो मेरी personal lawyer है। जब तक ये है, मुझे कोई सज़ा नहीं मिल सकती!"

उसकी बात सुनकर पूरी क्लास ठहाकों से गूँज उठती, और Rekha भी अपनी मुस्कान छिपा नहीं पाती।

समय के साथ Radha की माँ को भी यह एहसास हो गया कि उनकी बेटी चाहे कितनी भी शरारती क्यों न हो, अगर उसके साथ Rekha है तो चिंता की कोई बात नहीं।

वो अक्सर प्यार से कहतीं—

"मुझे Radha की पढ़ाई की चिंता नहीं होती... क्योंकि उसकी Rekha साथ है। ये लड़की सिर्फ अपनी नहीं, मेरी बेटी की भी guardian है।"

धीरे-धीरे भरोसा इतना गहरा हो गया कि अगर कभी Radha कोई गलती कर बैठती, तो डाँट पहले Rekha को सुननी पड़ती।

"तूने ध्यान क्यों नहीं दिया? तुझसे ही तो कहा था Radha को संभालने के लिए!"

Rekha बिना कोई सफाई दिए चुपचाप सब सुन लेती।

लेकिन उसके चेहरे पर शिकायत की जगह एक हल्की-सी मुस्कान होती।

क्योंकि उसके लिए Radha कोई साधारण दोस्त नहीं थी...

वो उसकी अपनी छोटी बहन थी।

और बहनों की जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए कभी सफाइयाँ नहीं दी जातीं।


✨ एक प्यारा-सा किस्सा

एक दिन Radha की माँ ने उसे ज़बरदस्ती पढ़ने के लिए बैठा दिया।

मन मारकर उसने किताब तो खोल ली, लेकिन मुश्किल से दस मिनट बीते होंगे कि उसने लंबी साँस लेते हुए किताब बंद कर दी।

"बस Rekha... अब मुझसे नहीं होगा। चल ना... बाहर खेलते हैं!"

Rekha ने तुरंत किताब उसकी तरफ़ वापस सरका दी।



"नहीं... पहले ये सवाल पूरा कर। उसके बाद जितना खेलना है, खेलेंगे।"

Radha ने मुँह फुला लिया।

"तू तो बिल्कुल टीचर बन गई है। दोस्त है या jailer?"

Rekha मुस्कुराई और प्यार से बोली—

"दोस्त हूँ... और सच्चे दोस्त वही होते हैं जो सही रास्ता दिखाएँ। चल... जल्दी से पूरा कर, फिर पूरा मैदान हमारा होगा।"

Radha बड़बड़ाती रही...

"पता नहीं दोस्त मिली है या principal..."

लेकिन आखिरकार उसने सवाल पूरा कर लिया।

और जैसे ही आख़िरी उत्तर लिखा, दोनों बिजली की रफ्तार से घर से बाहर निकलीं और अगले ही पल पूरे मैदान में उनकी हँसी गूँज रही थी।


✨ दोस्ती का रंग

स्कूल का हर वार्षिक समारोह...

हर परीक्षा...

हर खेल प्रतियोगिता...

हर छोटी-बड़ी खुशी...

हर मुश्किल...

इन सबमें Rekha और Radha हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़ी दिखाई देती थीं।

उनकी दोस्ती में न कोई स्वार्थ था, न कोई दिखावा...

सिर्फ़ अपनापन था।


Radha अक्सर मुस्कुराकर कहती—

"अगर मेरी Rakhi मेरी ज़िंदगी में नहीं होती... तो मेरी दुनिया सच में अधूरी होती।"

और Rekha मन ही मन एक वादा दोहराती—

"जब तक मैं हूँ... Radha पर कोई आँच नहीं आने दूँगी। चाहे जो भी हो।"


⏳ समय का सफ़र...

वक्त अपनी रफ़्तार से आगे बढ़ता गया।

बचपन किशोरावस्था में बदलने लगा।

चेहरों पर मासूमियत के साथ जिम्मेदारियाँ भी आने लगीं।

लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदली...

Rekha और Radha की दोस्ती।

जहाँ Radha आज भी बेफिक्र और लापरवाह थी...

वहीं Rekha अब भी उसकी ढाल बनकर हर मुश्किल के सामने खड़ी रहती थी।

धीरे-धीरे उनकी दोस्ती पूरे गाँव में मिसाल बन गई।

लोग अक्सर कहा करते—

"अगर सच्ची दोस्ती देखनी हो... तो Rekha और Radha को देखो।"

उन्हें क्या पता था...

कि किस्मत ने इन दोनों की ज़िंदगी के लिए एक ऐसा मोड़ पहले ही लिख दिया था...

जो उनकी दोस्ती की सबसे कठिन परीक्षा बनने वाला था


Stay tuned for Part 2 of "Dosti"

जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।

❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।




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