बस इतना ही था Part - 4 (Love Story )
Welcome to my story blog!
This is Part Four of an original Hindi love story, titled:
Bas Itna Hi Tha (बस इतना ही था)
Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.
If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.
Thank you for reading, and feel free to share your thoughts in the comments.
भाग – 4 अवंतिका एक आदत
जैसा की लास्ट पार्ट में हमने देखा की अब अवंतिका और देव की बातचीत बढ़ चुकी है आईये इस पार्ट में उनके बीच की जुगलबंदी को पढ़ते हैं ...
वो एक साधारण सी रात थी। देव मुंबई के अपने कमरे की खिड़की के पास बैठा था — हल्की बारिश हो रही थी, और बैकग्राउंड में लो-फाय म्यूज़िक चल रहा था।
उसने अवंतिका को एक कविता भेजी — कृष्ण पर लिखी हुई।
“मुरली की वो धुन, जैसे रूह को छू जाए, और राधा की वो चुप्पी — जैसे प्रेम बिना कहे बह जाए।”
कुछ देर बाद अवंतिका का जवाब आया:
“खूबसूरत है… लेकिन मेरे भोले के सामने ये मुरलीवाला कुछ फीका-सा लगता है।” 😄
देव ने चौंकते हुए रिप्लाई किया:
“फीका? बाँके बिहारी? फीका?! ये बात तो ठाकुर जी को बतानी पड़ेगी।”
अवंतिका ने हँसते हुए लिखा:
“तुम्हारे कृष्ण तो बहुत चतुर हैं… माखन चुराते हैं, झूठ बोलते हैं, और सोलह हज़ार रानियाँ! मेरे भोले? सीधे, सरल, ध्यानमग्न… हर भक्ति को अपनाने वाले।”
देव ने लिखा:
“सही कहा। तुम्हारे भोले सबको अपनाते हैं — और मेरे कान्हा सबके मन में समा जाते हैं।”
अवंतिका: “मेरे शिव तांडव करते हैं, सृष्टि को समेटते हैं… और तुम्हारे कृष्ण? बंसी बजाते हैं!”
देव: “बिलकुल… क्योंकि जहाँ सृष्टि टूटती है, वहाँ शिव ज़रूरी हैं। लेकिन जहाँ दिल टूटता है, वहाँ कृष्ण ज़रूरी हैं।”
अब कुछ पल के लिए दोनों ही चुप हो गए। फिर अवंतिका ने लिखा:
“सच कहूँ, शायद शिव और कृष्ण में कोई तुलना हो ही नहीं सकती। एक मौन है, तो एक संगीत। एक वैराग्य है, तो एक रास। एक समाधि है, तो एक लीला।”
देव: “और शायद इसीलिए… तुम शिव की हो… और मैं कृष्ण का। लेकिन हमारी बातचीत — जैसे शिव और कृष्ण की जुगलबंदी।”
अवंतिका ने बस इतना लिखा: “हर शाम, जब तुम मुझे कुछ नया भेजते हो — वो भी तो एक तरह की पूजा है। तुम कविता में कृष्ण खोजते हो… और मैं खामोशी में शिव।”
देव मुस्कुरा उठा। उस रात, उसने एक नई कविता लिखी — जिसका शीर्षक था: "जब शिव और कृष्ण मुस्कुराए"
“तर्क थम गए थे,
शब्द रुक गए थे...
सिर्फ दो भक्त थे…
और उनके इष्ट…
मुस्कुराते हुए।”
कॉलेज का आख़िरी साल अब समाप्ति की ओर था। देव अब पहले से ज्यादा आत्मविश्वासी दिखता था — मंचों पर कविता पढ़ता, लोगों से मिलना-जुलना भी करता। बहुतों को लगता, “यही तो है वो संवेदनशील कवि — इतना शांत, इतना गहरा…”
कई लड़कियाँ अब उसकी ओर आकर्षित होने लगी थीं — उसकी आँखों की उदासी, उसके शब्दों की मिठास, और उसके भीतर छिपी सच्चाई... सब कुछ उन्हें अलग-सा लगता।
एक दिन, कॉलेज के एक साहित्य समारोह के बाद, एक लड़की — रिया, उससे मिलने आई।
“तुम्हारी कविता बहुत प्यारी थी… तुम्हारे शब्दों में कुछ ऐसा है… जो सीधा दिल को छू जाता है।” देव ने हल्की-सी मुस्कान दी, “शुक्रिया…” रिया थोड़ी और बात करने लगी, पर देव की निगाहें किसी और दृश्य में खो चुकी थीं।
अवंतिका की याद फिर से सामने आ गई थी — वो शामें जब वो उसकी लिखी हुई कविता पढ़ती थी, वो मैसेज जिसमें वो उसे हिम्मत देती थी, और वो भोलेनाथ वाली मुस्कान…
“तुम्हारी कविता सुनकर, लगता है तुम बहुत अकेले हो…” — रिया बोली। देव एक पल के लिए चुप रहा। फिर कहा: “अकेलापन तब नहीं होता जब कोई पास ना हो… बल्कि तब होता है जब कोई पास होकर भी... पास ना हो।” रिया समझ नहीं पाई, पर धीरे-धीरे महसूस करने लगी कि देव का मन किसी और के पास है — और वहाँ तक कोई पहुँच नहीं सकता।
--- ऐसे ही कई बार होता… कोई लड़की उसकी किताब के बारे में पूछती, कोई इंस्टाग्राम पर कविता पर कमेंट करती, कोई टहलते हुए उसके पास बैठ जाती… पर हर बार देव की आँखों में एक ही चेहरा उतर आता — अवंतिका। "वो जो कभी मेरी नहीं थी… पर मैं आज भी उसी का हूँ।"
अब लोग कहते थे: “देव अच्छा लड़का है… पर थोड़ी दूरी बनाए रखता है।” “उसका ध्यान कहीं और रहता है…” “वो बहुत Reserved है…" कोई नहीं जानता था — कि उसके मन का मंदिर पहले ही किसी एक छवि से भर चुका है।
एक रात देव ने डायरी में लिखा: "मैंने चाहा कि किसी और में तुम ढूँढ लूँ… पर हर बार वही भूल की — क्योंकि तुम सिर्फ एक नाम नहीं थी, तुम आदत बन चुकी हो।"
जैसा की हम देख सकते हैं देव ने अवंतिका को अब अपनी आदत बना लिया है, अगले पार्ट में हम देखेंगे की क्या उसे इस आदत के कारन क्या क्या झेलना पड़ेगा .......
[जारी है…]
Stay tuned for Part 5 of "Bas Itna Hi Tha" —
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।
❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।
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