बस इतना ही था Part - 8 (Love Story )
Welcome to my story blog!
This is Part 8th of an original Hindi love story, titled:
Bas Itna Hi Tha (बस इतना ही था)
Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.
If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.
Thank you for reading, and feel free to share your thoughts in the comments.
भाग – 8 “दो चुप्पियों का संवाद”
जैसा की पिछले पार्ट में हमने देखा था की अवंतिका ने देव को बोला की वो सिर्फ शिव से प्यार करती है, इस पार्ट में हम उसके आगे की कहानी देखेंगे......
उस रात जब Dev ने पूछा था —
“क्या तुमने कभी किसी से सच्चा प्यार नहीं किया है?”
तो Avantika ने सहजता से कहा था —
“मेरा पहला और सबसे गहरा प्यार हमेशा शिव से रहा है…”
लेकिन मोबाइल स्क्रीन की रोशनी बुझने के बाद,
जब कमरे में बस अंधेरा और खिड़की से आती चाँदनी बची,
तो Avantika बहुत देर तक छत की ओर देखती रही।
उसके भीतर एक अनकही हलचल थी।
उसने मन ही मन खुद से कहा —
“क्यों हर बार Dev मुझे आईना दिखा देता है?
क्यों उसके सवाल मेरे दिल की जड़ तक पहुँच जाते हैं?
मैं तो सोचती थी कि मैं सिर्फ़ दोस्त बनकर रहूँगी…
पर उसकी आँखों में वो सच्चाई दिखती है,
जिसे नकारना मेरे लिए आसान नहीं।”
उसने तकिए पर सिर घुमाया और लंबी साँस ली।
फिर धीरे से बुदबुदाई —
“हाँ Dev, सच ये है कि मैंने कभी किसी इंसान से वो प्यार नहीं किया,
जितना तुम मुझसे महसूस कराते हो।
पर मैं डरती हूँ…
डरती हूँ कि अगर मैंने इस एहसास को नाम दे दिया,
तो कहीं ये रिश्ता भी वही अंत न पाए,
जैसा मैंने औरों को टूटते हुए देखा है।
तुम इतने कोमल हो, Dev…
तुम्हारी मासूमियत मुझे खींचती है,
पर उसी मासूमियत से मुझे डर भी लगता है।
अगर तुम टूट गए… तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगी।”
Avantika ने करवट बदली।
उसकी आँखों में हल्की-सी नमी थी।
वो प्रार्थना-सी मुद्रा में हाथ जोड़कर फुसफुसाई —
“शिव, आप जानते हो न…
मैं क्यों चुप रहती हूँ।
मैं क्यों Dev को सिर्फ़ समझने देती हूँ,
पाने नहीं।
अगर मैं उसे अपना कह दूँ…
तो शायद वो मेरी सबसे बड़ी शक्ति बन जाए।
पर अगर कभी मैंने उसे खो दिया…
तो वही मेरी सबसे बड़ी कमजोरी भी बन जाएगा।”
थोड़ी देर बाद उसने अपनी हथेली सीने पर रखी,
मानो दिल की धड़कन से सवाल पूछ रही हो।
“क्यों हर बार उसका नाम सुनकर ये दिल तेज़ धड़कने लगता है?
क्या ये भी मेरी शिवभक्ति का ही हिस्सा है…
या सचमुच वही प्यार है,
जिससे मैं हमेशा भागती रही हूँ?”
Avantika ने आँखें बंद कर लीं।
उसका मन दो हिस्सों में बँट चुका था —
एक हिस्सा उसे Dev की ओर खींच रहा था,
और दूसरा उसे रोक रहा था।
उसकी अंतिम फुसफुसाहट कमरे की ख़ामोशी में गुम हो गई —
“कभी-कभी प्यार सबसे बड़ा त्याग बन जाता है, Dev…
और शायद यही मेरी किस्मत है।”
उसी समय…
अपने कमरे की खिड़की पर बैठे Dev भी मोबाइल स्क्रीन को ताक रहा था।
Avantika की आख़िरी लाइन उसके दिल में गूँज रही थी —
“लोग जब बहुत करीब आ जाते हैं… तो डर लगता है…”
Dev ने गहरी साँस ली और सोचा —
“वो हमेशा बात मोड़ देती है…
पर क्यों मुझे लगता है कि उसकी हर चुप्पी,
उसका हर डर, कहीं न कहीं मेरे लिए ही है?”
उसका मन उसे समझा रहा था,
पर दिल हार मानने को तैयार नहीं था।
“मैं जानता हूँ Avantika,
तुम्हें खोने का डर तुम्हें रोकता है…
पर मुझे पाने का हक़ भी तो कहीं न कहीं तुम्हारे दिल में है।”
वो मन ही मन लिखने लगा —
“Avantika…
तुम्हारी ख़ामोशी भी एक तरह की ज़ुबान है।
तुम्हारे डर भी तुम्हारे जज़्बात कहते हैं।
तुम मुझे रोकती नहीं हो,
पर मुझे आगे बढ़ने भी नहीं देतीं।
शायद तुम्हें डर है कि मैं टूट जाऊँगा…
पर सच तो ये है Avantika —
तुम ही मेरी सबसे बड़ी ताक़त हो।”
उसने खिड़की से आसमान की तरफ़ देखा।
चाँदनी का उजाला उसके चेहरे पर पड़ रहा था।
उसके दिल से बस यही आवाज़ निकली —
“अगर ये रिश्ता अधूरा भी रहा…
तो भी ये मेरे लिए सबसे मुकम्मल कहानी होगी।”
उसने हल्के से मुस्कुराकर डायरी में लिखा —
“कभी-कभी दो चुप्पियाँ
शब्दों से भी ज़्यादा बातें करती हैं…
और शायद हमारी कहानी भी
उन्हीं चुप्पियों में पूरी हो जाएगी।”
रात भर करवटें बदलने के बाद
Avantika को पता भी नहीं चला कि कब नींद ने उसे अपने आगोश में ले लिया।
पर नींद भी चैन नहीं दे पाई —
उसके सपनों में Dev की आँखें,
और शिव का शांत चेहरा
एक साथ आ-आकर उसे उलझाते रहे।
सुबह की पहली किरण खिड़की से भीतर आई,
और Avantika की पलकों को हल्के से छुआ।
उसने अनमनी-सी आँखें खोलीं।
कमरे में एक अजीब सन्नाटा था,
जैसे दीवारें भी उसकी रात की बातें सुन चुकी हों।
वो उठकर आईने के सामने खड़ी हो गई।
अपने ही चेहरे को देर तक निहारती रही।
धीरे से बोली —
“ये मैं हूँ…
पर क्यों लगता है जैसे ये आँखें अब मेरी नहीं रहीं।
इनमें Dev की परछाई बस चुकी है।”
उसने माथे पर हाथ रखा,
फिर शिवलिंग के सामने दीपक जलाया।
प्रार्थना करते हुए उसकी आवाज़ काँप रही थी —
“शिव… मुझे राह दिखाइए।
क्या ये भावनाएँ भी आपकी ही परीक्षा हैं?
अगर Dev सच में मेरे जीवन का हिस्सा है,
तो आप मुझे डर से मुक्त कर दीजिए।
वरना मेरी चुप्पी को मेरी ताक़त बना दीजिए,
ताकि मैं उसे दूर से ही संभाल सकूँ।”
दीपक की लौ हौले-हौले हिल रही थी,
जैसे शिव खुद उसे उत्तर दे रहे हों।
Avantika की आँखें नम हो गईं,
पर होंठों पर हल्की शांति उतर आई।
उसी समय…
Dev की रात भी अधूरी रही थी।
वो सुबह होते ही डायरी लेकर छत पर चला गया।
ठंडी हवा उसके चेहरे से टकराई,
पर दिल का बोझ जस का तस था।
उसने लिखा —
“Avantika,
तुम्हारी चुप्पी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है।
तुम्हारे डर में भी एक सच्चाई छुपी है।
पर अब शायद मुझे तय करना होगा…
कि मैं इंतज़ार में ही जियूँ,
या अपनी भावनाओं को एक रूप दे दूँ।”
वो कुछ देर तक आसमान को देखता रहा।
सूरज की रोशनी में वो चाँद,
जो रात उसका साथी था, अब कहीं गुम हो गया था।
Dev बुदबुदाया —
“शायद मुझे भी चाँद की तरह होना होगा…
भले ही दिन की रोशनी में खो जाऊँ,
पर रात होते ही फिर लौट आऊँ…
उसी की खिड़की तक।”
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
आज पहली बार उसके मन में यह ख्याल आया —
“क्या मुझे Avantika से साफ़-साफ़ अपने दिल की बात कह देनी चाहिए?
या फिर उसकी चुप्पी को ही उसका जवाब मान लेना चाहिए?”
उसके हाथ अनायास मोबाइल की ओर बढ़े,
लेकिन अगले ही पल उसने खुद को रोका —
“नहीं… ये सुबह जवाब माँगने की नहीं,
बल्कि समझने की है।
Avantika को भी वक़्त चाहिए।
शायद शिव ही उसे मेरी ओर भेजेंगे…
अगर ये रिश्ता सच में होना है।”
उसने डायरी बंद की और आसमान की तरफ़ हाथ जोड़ दिए।
उस सुबह Avantika और Dev —
दोनों ने अलग-अलग जगहों पर
एक ही प्रार्थना की थी —
“हे ईश्वर, अगर ये भावनाएँ सच्ची हैं…
तो इन्हें अधूरा मत छोड़ना।”
सूरज धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहा था।
दोनों के दिलों में अब एक नई बेचैनी थी —
पर इस बार उस बेचैनी में उम्मीद भी शामिल थी।
कभी-कभी किस्मत रिश्तों को नाम नहीं देती,
बस उन्हें एक एहसास बना छोड़ देती है।
और वही एहसास जीवन की सबसे गहरी कहानी बन जाता है
अगले पार्ट में हम देखेंगे की अवंतिका और देव की जिंदगी किस ओर मोड़ लेती है?????
[जारी है…]
Stay tuned for Part 9 of "Bas Itna Hi Tha" —
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।
❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।
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