Bas Itna Hi Tha - Part 13 : Final Chapter

 Welcome to my story blog!

This is Part 13 th of an original Hindi love story, titled:

Bas Itna Hi Tha (बस इतना ही था)

Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.

If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.

Thank you for reading, and feel free to share your thoughts in the comments.

Part 13 : Final Chapter

December का महीना था।
Avantika की शादी तय हो चुकी थी — पिछले महीने।

एक अच्छे परिवार, अच्छे लड़के के साथ…
सब कुछ ‘सही’ था।
और शायद यही सबसे बड़ी मुश्किल थी —
सब कुछ सही था,
पर कुछ भी ‘Dev’ नहीं था।


उस दिन Avantika ने ठान लिया था —
आज वो Dev को सब सच बता देगी।
सीधा, साफ़…
जैसे भी टूटे, पर झूठ के सहारे नहीं।

उसे पता था कि Dev के लिए ये कोई मामूली बात नहीं होगी।
शायद उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा झटका होगा।


लेकिन तभी Dev का मैसेज आया —

“कल मेरा फाइनल इंटरव्यू है Avantika,
इतने साल की मेहनत का नतीजा है…
थोड़ा नर्वस हूँ, पर excited भी।”

Avantika स्क्रीन देखती रह गई।
उसके होंठों पर अटके हुए शब्द,
उसी पल अंदर ही कहीं घुट गए।

उसने बस जवाब दिया:

“All the best, Dev!
You’ll do great :)
भगवान सब अच्छा करेंगे…”


उधर Dev पूरी रात तैयारी करता रहा।
फाइल्स समेटता,
mirror के सामने mock interviews देता रहा।

उसे कहाँ पता था—
जिस इंसान की दुआओं से वो अपनी किस्मत लिख रहा है,
उसी की किस्मत में अब वो नहीं था।




Interview अगले दिन ठीक से नहीं गया।
Panel बहुत technical था।
Dev उदास था, पर Avantika के मैसेज ने थोड़ी हिम्मत दी।




Avantika फिर सच कहने ही वाली थी…
लेकिन Dev की टूटी हुई उम्मीद ने उसे रोक दिया।
उसने typing खोली… फिर बंद की।
और आख़िरकार, चुप्पी चुन ली।


Saturday, 3 Jan 2022.
Dev का दूसरा इंटरव्यू था।
इस बार वो कामयाब हुआ।
दिल से महसूस किया — “हाँ, मैं कर गया।”




वो बाहर निकलते ही Avantika को मैसेज टाइप करने लगा —

“Suno… mujhe tumse kuchh important baat करनी है…”

लेकिन send करने ही वाला था कि Avantika का मैसेज आया:

“Dev… mujhe bhi tumse kuch kehna hai…”

दोनों typing में रुक गए।
फिर Avantika ने भेजा:

“Aaj meri engagement thi…”

Dev की सांस जैसे आधी छूट गई।
उसने शब्द फिर-फिर पढ़े…
पर वो नहीं बदले।




कुछ देर बाद Dev ने लिखा:

“Congratulations…”

फिर जोड़ दिया:

“Main tumse yahi kehna chahta tha ki…
maine bhi job interview crack kar liya।”

Avantika का जवाब था:

“I’m happy for you, Dev… really.
Tum deserve karte ho sab कुछ अच्छा।”

 

Dev screen देखता रहा।
आज पहली बार, किसी जीत ने उसे इतना हारा हुआ महसूस कराया।




उस रात Dev ने डायरी में लिखा:

“जिस दिन मैंने सोचा था सब कह दूँगा…
और उसी दिन तुम किसी और की हो गईं।
शायद इसी को किस्मत कहते हैं।”

कुछ दिन बाद Dev ने casually पूछा:

“Engagement की pictures नहीं भेजी…
वैसे, शादी की तारीख फिक्स हुई क्या?”

Avantika:

“हाँ… next month की 10th को है।
घर में सब बहुत खुश हैं।”

Dev ने तारीख को देखा —
10 February.
अब वो तारीख उसके लिए कभी वैसी नहीं रहेगी।



उसने पूछा:

“और तुम्हारे fiancé? क्या करते हैं?”

Avantika:

“He’s a doctor. बहुत grounded इंसान हैं…
और सबसे बड़ी बात — उन्होंने दहेज लेने से मना कर दिया।
मम्मी-पापा के लिए जैसे blessing हैं।”

Dev ने हल्का सा 🙂 टाइप किया।

“अच्छा है Avantika…
तुम deserve करती हो ऐसा ही कोई इंसान।”

पर अंदर ही अंदर बस एक ही बात सोच रहा था:

“काश तुमने एक बार पूछा होता —
कि Dev, तुम कैसा feel कर रहे हो?”


उसने आखिरी बार एक status डाला:

“जिसे मैं सबसे ज़्यादा चाहता था,
उसे मैं सबसे ज़्यादा खुश देखना चाहता हूँ…
भले ही वो मेरी ना रही हो।”

Avantika ने status देखा।
बहुत कुछ महसूस किया।
पर कोई जवाब नहीं दिया।
क्योंकि अब बात जवाब देने की नहीं रही थी…
बल्कि जाने देने की थी।


उस दिन के बाद Avantika ने Dev को कभी मैसेज नहीं किया।
ना ‘Hi’, ना ‘Good morning’,
ना ‘शायरी’, ना ‘कविता’।
बस… एक स्थिर ख़ामोशी।

Dev भी अब पहले जैसा नहीं था।
अब वो हर seen message में meaning नहीं ढूँढता था।
अब वो जान गया था —
कुछ बातें कभी कही नहीं जातीं,
और कुछ लोग कभी लौटते नहीं।


कभी-कभी, जब वो कॉफ़ी शॉप के कोने में बैठा होता,
या बारिश में खिड़की से बाहर देख रहा होता,
Avantika की कोई बात, कोई emoji याद आ जाती।
वो मुस्कराता,
फिर खुद से कहता:

“Shayad वो वहीं तक थी… और मैं भी।”


 


अब Dev लिखता था,
पर वो कविताएँ Avantika के लिए नहीं…
खुद के लिए होती थीं।
अब उसके शब्द किसी और से नहीं,
बस उसके अपने दिल से बातें करते थे।




Final Line

“कुछ अधूरी कहानियाँ कभी पूरी नहीं होतीं…
पर वो अधूरी रहकर ही सबसे ज़्यादा पूरी लगती हैं।”


Stay tuned for a new story. 

❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।

Comments

Popular posts from this blog

Bas Itna Hi Tha (बस इतना ही था) Part - 1 (Love Story )

Unspoken Bond Part 1 : लेक्चर हॉल की टेंशन

Twaif Chapter 1: The Jungle Night