बस इतना ही था Part - 11(Love Story )

  Welcome to my story blog!

This is Part 11 th of an original Hindi love story, titled:

Bas Itna Hi Tha (बस इतना ही था)

Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.

If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.

Thank you for reading, and feel free to share your thoughts in the comments.

भाग – 11  “✨ "एक मैसेज… चार महीने की तन्हाई" ✨ ”

Dev की आदत बन गई थी —
हर सुबह Avantika का ‘Good Morning’ देखना,
हर शाम उससे दिन की थकान बाँटना,
और हर रात… उसे याद करके कुछ ना कुछ लिख देना।

लेकिन अब कुछ बदल raha tha..

उसने पिछले कुछ दिनों में WhatsApp पर थोड़े से अलग status लगाने शुरू किए थे —
हल्के से रोमांटिक…
छुपे हुए इशारों से भरे हुए।

जैसे —

“तू समझे ना समझे मेरी खामोशी को,
पर मैं हर बार तुझे ही सोच कर चुप रहता हूँ…”

या फिर:

“कुछ फासले वक्त से नहीं… दिल की हदों से होते हैं।”
और एक दिन…
Avantika ने वो स्टेटस देखा।
फटाक से।
और वो समझ गई।


उसी रात उसका मैसेज आया:

“Hey Dev…
मेरे final exams बहुत करीब आ रहे हैं,
तो मैं शायद कुछ समय online न रहूँ…”

Dev ने typing शुरू की…
फिर रुक गया।

वो सब कुछ कहना चाहता था,
पर कुछ भी कह नहीं सका।

बस इतना भेजा:

“All the best. Take care.” 🌿


 


फिर चार महीने बीत गए।

न कोई मैसेज,
न कोई status update,
न कोई ‘seen’ का निशान…
बस एक लंबा सन्नाटा।

Continue....
चार महीने बीत चुके थे feb ka mahina tha…
Dev अब भी हर दिन WhatsApp खोलता था।
मैसेज लिस्ट में सबसे ऊपर Avantika का नाम,
पर चैट उतनी ही ख़ामोश।

उसकी DP अब भी वही थी —
श्रीकृष्ण का नीली आभा में झलकता चेहरा,
होंठों पर बाँसुरी।




Avantika की नज़र से
एक शाम पढ़ाई से थककर Avantika ने फ़ोन खोला।
अनजाने में Dev की DP पर उँगली टिक गई।
काफी देर तक वो उसे देखती रही।

उसने मन ही मन सोचा:

“ये कैसी बात है…
वो मुझसे कुछ कहता नहीं,
पर हर बार उसकी DP मुझे जवाब दे देती है।
जैसे उसकी ख़ामोशी भी बाँसुरी की धुन बनकर
मेरे दिल तक पहुँच जाती है।”

उसकी आँखें नम हो आईं।
वो मुस्कुराई और धीरे से बुदबुदाई:

“Dev… तुम सच में अलग हो।
तुम्हें चुप रहने की भी कला आती है।”
Avantika ने चार महीने तक Dev को मैसेज नहीं किया।
ना “Hi”,
ना “Notes”,
ना कोई बहाना।

उसने कई बार सोचा —
“एक बार पूछ लूँ कि वो कैसा है…”
पर तुरंत खुद को रोक लिया।

“अगर मैंने उससे बात शुरू कर दी,
तो मैं फिर कभी इस दूरी को नहीं निभा पाऊँगी।
Dev बहुत संवेदनशील है…
उसकी छोटी-सी उम्मीद भी
उसे बाँध देगी,
और फिर शायद वो कभी आज़ाद नहीं हो पाएगा।”


उसने फ़ोन हाथ में लेकर Dev की DP देखी —
श्रीकृष्ण की वही तस्वीर।
और उसके मन में आवाज़ आई:

“कृष्ण ने भी तो अर्जुन को हर बार मोह से ऊपर उठना सिखाया था।
शायद मुझे भी वही करना होगा।
ये रिश्ता अगर बाँधने लगे,
तो इसे मौन में ही रहने देना बेहतर है।”


उसने WhatsApp बंद कर दिया।
और किताब खोल दी।
पर पन्नों पर शब्दों से ज़्यादा
उसके दिल में Dev की ख़ामोशी गूंज रही थी।

Dev की ओर

उधर Dev अब भी लिख रहा था।
हर रोज़ डायरी में कुछ नया।
पर अब उसे धीरे-धीरे समझ आने लगा था —

“शायद वो सचमुच मुझे avoid कर रही है…
शायद उसकी चुप्पी ही उसका आख़िरी जवाब है।”

फिर भी, उसने लिखा:

“Avantika,
अगर तुम्हारा मौन तुम्हारा निर्णय है,
तो मैं उस निर्णय की भी इज़्ज़त करूँगा।
पर याद रखना —
कभी-कभी सबसे गहरी बातें
इसी ख़ामोशी में कही जाती हैं।”



उसी दौरान… 10 फ़रवरी का दिन आया — Dev का जन्मदिन।

आम दिनों में भी वो जश्न से दूर ही रहता था,
पर इस बार उसका मन और भी भारी था।
घरवालों ने raat ko hi छोटा-सा केक काटा,
दोस्तों ने फोन कर दिया,
लेकिन Dev का ध्यान बस एक नाम पर टिका हुआ था।



Avantika ने अपने फोन को बार-बार देखा था।
10 फ़रवरी की तारीख स्क्रीन पर चमक रही थी।

वो खुद से कह रही थी:

“नहीं… मुझे उसे मैसेज नहीं करना चाहिए।
मैं जितनी चुप रहूँगी, उतना ही बेहतर है।”

उसने किताब खोली, exam notes पलटे,
पर ध्यान कहीं और ही अटका था।

दिल के भीतर से आवाज़ आई:

“लेकिन आज उसका जन्मदिन है…
क्या सच में मैं ये दिन भी चुप रहकर गुज़ार दूँ?”


 

वो बेचैन होकर कमरे में टहलने लगी।
शिवजी की मूर्ति के सामने जाकर बैठ गई और धीरे से बुदबुदाई:

“शिव… आप जानते हो न,
मैं Dev से दूरी क्यों बनाए रखना चाहती हूँ।
मेरा मक़सद उसे और गहरी उम्मीदें देना नहीं है।
लेकिन… अगर मैं आज उसे wish भी न करूँ,
तो क्या वो इसे मेरी बेरुख़ी समझेगा?”

उसकी आँखों में हल्की नमी थी।
वो जानती थी कि Dev हर छोटी बात दिल से लगाता है।

आख़िरकार उसने फोन उठाया,
और देर रात 12 बजे
बस इतना लिखा:

“Happy Birthday, Dev. 🌸
Stay blessed.”
भेजने के बाद उसके हाथ काँप रहे थे।
उसने फोन को तकिए के नीचे रख दिया
और गहरी साँस ली।

खुद से फुसफुसाई:

“मैंने बस एक दोस्त की तरह शुभकामना दी है…
बस यही समझेगा वो।
पर मैं जानती हूँ…
इस छोटे-से मैसेज में मेरा पूरा दिल छुपा है।”


 

रात भर करवटें बदलते हुए,
Avantika ने अपनी डायरी में एक लाइन लिखी:

“कभी-कभी हम जितना बचना चाहते हैं,
दिल उतना ही रास्ता ढूँढ लेता है।”

10 फ़रवरी की रात…
ठीक 12:21 पर Dev का फोन चमका।

स्क्रीन पर नोटिफिकेशन आया —
“Happy Birthday, Dev. 🌸 Stay blessed.”

उसकी आँखें कुछ पल के लिए ठहर गईं।
चार महीने की चुप्पी के बाद,
वो एक छोटा-सा मैसेज उसके लिए
किसी तूफ़ान से कम नहीं था।

उसने गहरी साँस ली।
चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई,
पर आँखें भीगने लगीं।

Dev के हाथ कुछ पल तक काँपते रहे।
वो देर तक उस छोटे-से संदेश को घूरता रहा।



उसके दिल ने कहा —

“वो मुझसे दूरी बना सकती है,
पर मेरे खास दिन पर चुप नहीं रह सकती।
इसका मतलब कहीं न कहीं…
मेरे लिए जगह अब भी है।”
उसने तुरंत reply टाइप करना शुरू किया:

“Thank you so much Avantika!
तुम्हारे message ने मेरा birthday सच में खास बना दिया…
तुम्हें पता भी नहीं, मैं पूरे दिन बस यही इंतज़ार कर रहा था।”

वो typing window में चमकते शब्दों को देखता रहा।
अँगुलियाँ ‘send’ पर जाने ही वाली थीं,
लेकिन तभी उसका दिल हिचक गया।

“क्या ये ज़्यादा personal हो जाएगा?
क्या वो सोचेगी कि मैं फिर वही उम्मीद पाल रहा हूँ?
नहीं… मुझे और बोझ नहीं डालना चाहिए।”

उसने धीरे से पूरा मैसेज select करके delete कर दिया।
फिर बहुत देर तक खाली स्क्रीन देखता रहा।

आख़िरकार बस इतना टाइप किया:

“Thank you :)”

और भेज दिया।

फोन रखकर वो खिड़की पर आ बैठा।
चाँदनी उसके चेहरे पर बिखरी हुई थी।
वो फुसफुसाया:

“कभी-कभी दिल सब कुछ कहना चाहता है,
पर दिमाग सिर्फ़ चुप रहना सिखाता है।
Avantika… तुमसे बात करना,
शायद अब मेरे लिए सबसे मुश्किल चीज़ बन गई है।”

उस रात Dev ने डायरी में लिखा:

“तेरे चार महीने की चुप्पी से ज़्यादा
तेरे दो शब्दों ने मुझे जी लिया।
10 फ़रवरी मेरे लिए हमेशा ख़ास रहेगा,
क्योंकि तूने मेरी ख़ामोशी तोड़ी थी।”

“तुम्हें सिर्फ़ एक लाइन लिखने में चार महीने लगे…
और मुझे तुम्हारे जवाब में एक शब्द भेजने में चार घंटे।
शायद यही हमारी कहानी का सच है —
हम दोनों अपने-अपने डर में कैद हैं।”


 

Avantika ने 10 फ़रवरी की रात को Dev को मैसेज भेजा था —
सिर्फ़ एक साधारण-सा “Happy Birthday, Dev. 🌸 Stay blessed.”

उसके बाद वो फोन को तकिये के पास रखकर लेट गई।
दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
चार महीने बाद उसने उससे कुछ लिखा था।
वो जानती थी कि ये उसके लिए बहुत मायने रखेगा।

पर वो ये भी जानती थी कि…
सीमा खींचना ज़रूरी है।

“मैं उसे आदत नहीं बनने देना चाहती…
मैं नहीं चाहती कि वो फिर से उम्मीद बाँध ले।”

कुछ देर बाद फोन वाइब्रेट हुआ।
Avantika ने स्क्रीन उठाई।

Dev का reply —
“Thank you :)”

बस इतना ही।

वो कुछ पल ठिठक गई।
होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आई, फिर फीकी पड़ गई।

उसने सोचा:

“Dev… तुम हमेशा अपने दिल को दबा लेते हो।
तुम्हारे भीतर जो कहना है, वो कभी बाहर नहीं आता।
क्या तुम वाकई डरते हो मुझसे… या मेरे जवाब से?”


 

उसका मन हुआ कि लिखे —
“क्या तुमने मेरे मैसेज का इंतज़ार किया था?”
या शायद —
“तुम्हें बर्थडे कैसा लगा?”

लेकिन उँगलियाँ स्क्रीन पर जाकर ठहर गईं।
उसने टाइप किया, फिर मिटा दिया।
फिर दोबारा टाइप किया, फिर मिटा दिया।

आख़िरकार फोन साइड में रखकर वो खिड़की के पास आ बैठी।
रात ठंडी थी, चाँद साफ़ आसमान में टंगा था।

Avantika ने गहरी साँस ली और मन ही मन बुदबुदाई:

“Dev… तुम नहीं जानते,
मैं हर शब्द को तौलकर क्यों लिखती हूँ।
मैं जितना तुम्हारे पास आना चाहती हूँ,
उतना ही तुम्हें खोने से डरती भी हूँ।”

उसने आँखें बंद कीं और प्रार्थना-सी मुद्रा में whispered:

“शिव… मुझे सही रास्ता दिखाओ।
क्या ये रिश्ता वाकई सिर्फ़ चुप्पियों में जीने के लिए बना है?”

उस रात Avantika ने कोई और मैसेज नहीं भेजा।
पर उसने अपनी डायरी खोली और लिखा:

“वो मुझे सिर्फ़ एक स्माइली भेजकर भी बहुत कुछ कह जाता है।
पर शायद हमारी सबसे बड़ी मज़बूरी यही है —
हम दोनों अपनी पूरी बात कभी कह ही नहीं पाते।”




 


Dev हर दिन सुबह उठता,
WhatsApp खोलता… Avantika की चैट पर जाता,
फिर स्क्रीन को देखता —
जैसे कोई "last seen" की उम्मीद बाकी हो।
लेकिन कुछ नहीं।
वो अब फिर उसी जगह आ गया था
जहाँ वो कॉलेज के पहले साल में था —
अजनबी चेहरों के बीच, अपनी कविताओं में डूबा हुआ।


एक शाम उसने अपनी डायरी में लिखा:

**“मैंने तेरी याद में चार महीने नहीं जिया… बस ठहरा रहा।

शायद तूने कुछ कह कर मुझसे दूरी बनाई,
और मैंने कुछ न कहकर तुझे जाने दिया।”**

अब Dev की कविताएँ और भी गहरी हो गई थीं…
पर अब उनमें सिर्फ भाव नहीं थे,
अब उनमें एक अधूरी चुप्पी भी बस गई थी।


मुंबई में Dev…
और उत्तराखंड में Avantika।

दोनों अपनी-अपनी ज़िन्दगी में उलझे थे,
पर रात की खामोशी में —
एक ही ख़्याल, एक ही नाम।


10 फ़रवरी बीते कुछ दिन हो चुके थे।
Dev अब भी वही मैसेज बार-बार खोलकर देखता —
“Happy Birthday, Dev. 🌸 Stay blessed.”

उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आती,
फिर आँखें बोझिल हो जातीं।

उसने डायरी में लिखा:

“तुम्हारा एक मैसेज,
मेरे पूरे दिन को ख़ूबसूरत बना सकता है।
पर तुम्हारी चुप्पी…
मेरी कई रातों को सुनसान कर देती है।”

वो खिड़की पर बैठा चाँद को ताक रहा था।
फिर मन में सोचा:

“क्या Avantika भी मुझे याद करती है…
या सिर्फ़ एक फ़रज़ निभाया था उसने?”


 


Avantika की रात
उधर, अपने कमरे में Avantika ने किताबें खोल रखी थीं।
Exams पास थे, पर पन्नों पर नज़र टिक नहीं रही थी।

वो अनजाने में बार-बार WhatsApp खोलती,
Dev की DP देखती —
जहाँ नीले रंग की हल्की आभा में
श्रीकृष्ण की तस्वीर थी।

वो तस्वीर जैसे Dev के ही मन का आईना थी —
शांत, गहरी, और रहस्यमयी।

Avantika ने सोचा:

“वो हमेशा भगवान कृष्ण को अपने करीब रखता है…
शायद इसलिए उसके सवाल
इतने सीधे दिल तक पहुँच जाते हैं।”

फिर मन ही मन बुदबुदाई:

“क्यों हर बार मुझे उसी की याद आती है…
जब मैं खुद को सबसे मज़बूत दिखाना चाहती हूँ?”

उसने अपनी डायरी खोली और लिखा:

“Dev को शायद लगता होगा मैं बहुत मज़बूत हूँ।
पर सच तो ये है…
मैं जितनी बार उसे avoid करती हूँ,
उतनी बार अंदर से टूट जाती हूँ।”


उस रात, दोनों ने खिड़की से आसमान देखा।
दोनों के शहरों में चाँद एक ही था।

Dev ने मन ही मन कहा:

“Avantika… काश तुम सुन पाती मेरी ख़ामोशी।”

और Avantika ने आँखे बंद कर whispered:

“Dev… काश तुम समझ पाते मेरे डर।”

दोनों अलग-अलग थे,
पर तन्हाई एक जैसी थी।



Avantika ने दूरी चुन ली थी, Dev ने ख़ामोशी…
पर तक़दीर ने उनके लिए क्या चुना है,
ये बस अगला हिस्सा बताएगा।

[जारी है…]

Stay tuned for Part 12 of "Bas Itna Hi Tha" —
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।

                                            

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