बस इतना ही था Part - 12(Love Story )

 Welcome to my story blog!

This is Part 12 th of an original Hindi love story, titled:

Bas Itna Hi Tha (बस इतना ही था)

Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.

If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.

Thank you for reading, and feel free to share your thoughts in the comments.

भाग – 12  "दोस्ती के इस पार, मोहब्बत के उस पार"

Dev उस रात अकेला बैठा था।
थोड़ी देर बाद उसने मोबाइल उठाया और status डाल दिया:

“कभी-कभी लगता है…
शायद मैं जितना कहता हूँ,
उतना कोई सुनता ही नहीं।”



Avantika ने वो status देखा।
उसका मन अचानक भारी हो गया।
उसने तुरंत Dev को message किया:

“Dev… सब ठीक है ना? तुम ऐसे status क्यों डाल रहे हो?
क्या तुम उदास हो क्योंकि मैं तुमसे बात नहीं कर रही थी?”

Avantika typing करने लगी…
फिर रुक गई।



Dev ने फिर भेजा:

“तुमसे कोई शिकायत नहीं है Avantika,
बस आदत हो गई थी…
और आदतें इतनी आसानी से नहीं जातीं।”

Avantika का जवाब आया:

“Dev… तुम जानते हो ना, मैं क्यों दूर हुई थी?”

“मैं नहीं चाहती थी कि तुम मुझसे उस तरह जुड़ो…
जिससे बाद में सिर्फ दर्द मिले।
मैं जानती हूँ, तुम बहुत सच्चे हो…
पर शायद मैं वो नहीं हूँ जो तुम्हारी सच्चाई deserve करती है।”

Dev थोड़ी देर चुप रहा।
फिर बस इतना लिखा:

“शायद तुम ठीक कहती हो…
पर कोई सच्चा सिर्फ इसलिए अधूरा रह जाए
क्योंकि वो ज्यादा सच्चा था —
ये भी तो गलत है।”

Avantika typing करने लगी… फिर भेजा:

“Dev…
क्या हम कुछ देर के लिए
बस दो दोस्त बन सकते हैं…
वैसे जैसे पहले थे?”

Dev ने पढ़ा। बहुत देर तक कोई जवाब नहीं दिया।

उसने मोबाइल रखा…
और अपनी डायरी खोली:

**“अब दोस्ती में वो बात कहाँ रह गई Avantika,
जहाँ दिल धड़कता था और तुम महसूस कर लेती थीं…

अब तो सब कह दिया मैंने —
और तुमने सब मिटा दिया।”**


Avantika का वो मैसेज Dev को आज भी याद है —

“क्या हम कुछ देर के लिए
बस दो दोस्त बन सकते हैं…
वैसे जैसे पहले थे?”

Dev जानता था…
Avantika को कुछ भी कह देना,
या इंकार कर देना,
मतलब था — उसे और उसकी दुनिया को हमेशा के लिए खो देना।

इसलिए उसने दिल तोड़ा… पर रिश्ता नहीं।
बस लिखा:

“हाँ…
जैसे पहले थे :)”

लेकिन वो “:)”
उस दिन पहली बार आँखों में आँसू लेकर टाइप किया गया था।


अब वे फिर बात करने लगे थे…
Avantika फिर से online आने लगी थी।
फिर से Dev की कविताओं पर “Beautiful” लिखती थी,
फिर से हल्के से teasing भी करती थी।

पर अब हर मुस्कान के नीचे Dev को वो “diwar” दिखने लगी थी
जो Avantika ने उनके बीच खड़ी कर दी थी।



Dev जानता था —
वो सिर्फ दोस्त नहीं रहा।

एक रात Dev ने फिर से हिम्मत की…

“Avantika… एक बात कहूँ?”

“हाँ, बोलो…”

“कभी-कभी तुम्हारी आँखों को देखने का मन करता है…
बस यूँ ही… कुछ कहे बिना, बस देखते रहूँ…”

Avantika कुछ सेकंड टाइप करती रही… फिर लिखा:

“क्या तुमने वो नई poetry contest देखी?
इस बार themes of love and longing हैं… तुम participate करोगे?”

Dev ने स्क्रीन देखा…
फिर अपने दिल की आवाज़ को अंदर ही दफ़ना दिया।

“हाँ… देखी है।
भेज दूँगा कुछ शायद।”


फिर से वही हुआ।
वो कुछ कहना चाहता था…
Avantika कुछ और सुनना चाहती थी।


Dev अब समझने लगा था —
Avantika सिर्फ उस हद तक पास आएगी,
जहाँ से वो उसे छू तो सके, पर थाम न सके।


उस रात Dev ने अपनी सबसे दर्दभरी कविता लिखी:

“तू हर बार बातों से टाल देती है,
मैं हर बार दिल से मान लेता हूँ।
तू बस दोस्ती के उस पार नहीं जाना चाहती,
और मैं बस दोस्ती के इस पार रुक नहीं पाता।”



कविता लिखने के बाद Dev देर तक उस पन्ने को घूरता रहा।
मोबाइल उसकी मेज़ पर रखा था… स्क्रीन बार-बार जल रही थी।

Avantika online थी।
पर इस बार Dev ने कुछ नहीं लिखा।

उसके मन में बस एक ही सवाल गूंज रहा था—

“क्या मैं सच में सिर्फ दोस्त बनकर रह पाऊँगा…
या फिर एक दिन ये खामोशी सब कुछ कह जाएगी?”


[जारी है…]

Stay tuned for Part 13 of "Bas Itna Hi Tha" —
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।

                                            

❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।

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