Unspoken Bond Part 3 :अधूरी समझ, पूरी दोस्ती

 Welcome to my story blog!

This is Part 3 of an original Hindi story, titled:

Unspoken Bond

Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.

If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.

Thank you for reading. Feel free to share your thoughts in the comments.

Part 3 – अधूरी समझ, पूरी दोस्ती

🎭 Competition Day

Auditorium में भीड़ बैठी थी।
Stage पर mic, judges और audience—Dilshan के लिए ये सब किसी युद्धभूमि से कम नहीं लग रहा था।
उसका नाम announce होते ही उसकी धड़कनें तेज़ हो गईं।

Dilshan (मन ही मन):
“काश invisible हो जाता…”

Lata ने elbow मारा और whisper किया:
Lata:
“भाई, invisible hero सिर्फ Marvel वाले होते हैं।
तू तो अपने आप को mute कर रहा है। अब बस unmute हो जा।”

Dilshan ने हल्की हँसी दी, लेकिन डर अब भी था।


Dilshan stage पर जाने से पहले काँप रहा था।
Lata ने उसके हाथ में पानी की bottle थमाई और बोली:

Lata:
“सुन, audience को judge मत समझ।
उनको ऐसे देख जैसे वो सब tuition class में सोते हुए students हैं।
तू बस इतना interesting बोल कि सबकी नींद टूट जाए।”

Dilshan (nervous हँसी के साथ):
“और अगर मैं अटक गया तो?”

Lata (फिलॉसॉफिकल अंदाज़ में):
“अटकना pause है, full stop नहीं।
Audience सोचेगी तू drama कर रहा है… बस confident दिख।”


Dilshan stage पर गया।
पहले दो words ही गले में अटक गए।
उसका दिमाग खाली।

अचानक उसे corridor वाली Lata की बात याद आई—
“अगर तू चुप रहा, तो मैं Prof से कह दूँगी—
‘Sir, Dilshan silent mode पर है।’”

ये सोचकर Dilshan खुद भी हल्का मुस्कुराया।
उस हँसी ने उसकी nervousness तोड़ दी।

उसने presentation शुरू किया।
आवाज़ थोड़ी काँपी, लेकिन धीरे-धीरे steady होती गई।
Audience attentively सुनने लगी।



⚡ The Twist

बीच में एक technical term भूल गया।
Dilshan रुक गया।
उसके दिमाग में panic दौड़ा।

लेकिन उसी पल उसे Lata की balcony वाली बात याद आई—
“Fail होना crime नहीं है। Crime ये है कि तू try ही न करे।”

उसने हिम्मत जुटाई, simple शब्दों में explain किया।
Audience ने clap किया—क्योंकि honesty और clarity सबको connect कर गई।




👏 After Performance

Dilshan stage से उतरा, चेहरे पर पसीना था लेकिन आँखों में चमक।
Lata पहले से इंतज़ार कर रही थी।

Lata (चिल्लाकर):
“वाह! Mr. Silent Mode आज तो Dolby Digital बन गया!”

Dilshan (मुस्कुराकर):
“ये सब तेरे कारण हुआ।”

Lata (फिलॉसॉफिकल टोन में, लेकिन मज़ाकिया):
“अरे नहीं महाराज! Hero तू ही था…
मैं तो बस background music थी।
और याद रख—Hero कभी background music से डरता नहीं।”

दोनों हँस पड़े।
Dilshan जान गया—उसकी जीत सिर्फ मंच पर नहीं थी,
बल्कि उसके डर के ऊपर भी थी।

Dilshan पहली बार खुद पर गर्व महसूस कर रहा था।
और उसे ये भी समझ आ गया था कि Lata सिर्फ उसकी दोस्त नहीं,
बल्कि वो funny philosopher है, जिसने उसे खुद से मिलवाया।



Competition में Dilshan का नाम आया – “Special Mention for Clarity.”
पूरे class ने clap किया।

Canteen में सब friends ने पार्टी माँगी।
Dilshan खुश था, लेकिन अंदर से थोड़ा serious भी—
वो पहली बार खुद को prove कर पाया था।

Lata usual tone में मज़ाक करने लगी:
Lata:
“भाई, आज तो तू celebrity हो गया!
Autograph ले लूँ क्या? या फिर QR code बना दूँ?”

सब हँस पड़े।
Dilshan भी हल्का मुस्कुराया, लेकिन इस बार उसे चुभा।



भीड़ छँटने के बाद Dilshan और Lata अकेले corridor से गुजर रहे थे।

Dilshan (धीरे लेकिन गुस्से में):
“तू हर चीज़ को मज़ाक में क्यों लेती है, Lata?
कभी serious होकर appreciate नहीं कर सकती?”

Lata (हैरान होकर):
“अरे! मैं तो तेरी tension कम करने के लिए मज़ाक करती हूँ।
तुझे पता भी है, मेरी हँसी तेरे confidence का shortcut है।”

Dilshan (कड़वाहट से):
“Shortcut? कभी-कभी लगता है तू मुझे serious लेती ही नहीं।
मैं struggle कर रहा हूँ, और तू बस jokes में उड़ा देती है।”

Lata चुप रह गई।
उसकी आँखों में पहली बार वो शरारती चमक नहीं थी।



उस शाम canteen की reserved table खाली रही।
Dilshan अकेले बैठा था।

Lata library में दिखी, पर पास नहीं आई।



Dilshan (सोचते हुए):
“शायद मैं overreact कर गया…
पर सच यही है, मुझे चाहिए था कोई जो मेरी struggle को समझे

ना कि हर बार मज़ाक में बदल दे।”




📉 Result Week

एक हफ़्ता बीता।
Inter-college competition का final result आया।
Dilshan का नाम winners में नहीं था।

वो घर पर अकेला बैठा था।
किताबें table पर खुली थीं, और उसकी आँखों में आँसू।

Dilshan (टूटे मन से):
“मैं कितना भी try करूँ, शायद मैं कभी first नहीं आ पाऊँगा।”

तभी phone बजा।
Riya थी—classmate।

Riya:
“Hey Dilshan… I’m really proud you tried.
Don’t be sad, तुम deserve करते थे win करने का।”

Dilshan ने weak आवाज़ में thank you कहा।
थोड़ा comfort मिला, लेकिन अंदर से उसका दिल और टूटा हुआ था।

क्योंकि… Lata का कोई call नहीं आया।
ना कोई text, ना कोई मज़ाक।



Dilshan (टूटे दिल से, अकेले खुद से):
“जितनी उम्मीद मैंने उससे लगाई थी,
उतना ही दर्द मिला।
शायद उसके लिए मैं बस एक दोस्ती का मज़ाक हूँ…
serious कभी था ही नहीं।”

उसकी आँखों से फिर आँसू बहने लगे।
Riya की sympathy soothing थी,
लेकिन Lata की चुप्पी उसे सबसे ज़्यादा चोट पहुँचा रही थी।



अब Dilshan और Lata के बीच सिर्फ गलतफ़हमी नहीं,
बल्कि एक emotional gap भी पैदा हो चुका था।
Dilshan सोच रहा था—
क्या Lata उसकी struggle और दर्द कभी समझ पाएगी?



👉[जारी है…]

Stay tuned for Part 4 of "Unspoken Bond" —
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।

❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।

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