Unspoken Bond Part 7 : The Conversation at the Temple
Welcome to my story blog!
This is Part 7 of an original Hindi story, titled:
Unspoken Bond
Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.
If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.
Thank you for reading. Feel free to share your thoughts in the comments.
🌸 Part 7 – The Conversation at the Temple
Next day, psychology class के बाद courtyard में Lata bench पर बैठी थी —
हाथ में prasād का packet, आँखों में unusual शांति थी।
सूरज की हल्की किरणें उसके बालों में चमक रही थीं,
और चेहरे पर एक अजीब-सी चमक थी — जैसे भीतर कोई शोर शांत हो गया हो।
Dilshan ने उसे देखा और मुस्कुराया —
“आज कुछ अलग लग रही है तू… बहुत शांत।”
Lata (smiling softly):
“सुबह Radha–Krishna mandir गई थी।
वहाँ बहुत सुन्दर आरती हो रही थी —
मुरली की धुन, फूलों की खुशबू, और दीये की लौ...
बस वही शांत कर गई।”
Dilshan:
“तू mandir जाती है?”
Lata:
“कभी-कभी।
क्योंकि वहाँ सवाल नहीं होते… बस जवाब महसूस होते हैं।”
Dilshan कुछ देर तक उसकी बातों में खोया रहा,
फिर हल्की seriousness के साथ बोला —
“Lata, एक बात पूछूँ?”
Lata:
“हमेशा।”
Dilshan:
“Krishna ने Radha से इतना प्यार किया,
फिर उनसे शादी क्यों नहीं की?”
Lata ने आसमान की ओर देखा —
जहाँ बादलों के बीच से सूरज झाँक रहा था।
Lata:
“क्योंकि Radha और Krishna का प्रेम अधूरा नहीं था, Dilshan —
वो पूर्णता का दूसरा रूप था।
उनका मिलन समाज के नियमों से नहीं, आत्मा के संबंध से था।
Radha, Krishna के प्रेम की अनुभूति है…
और Krishna, Radha की आत्मा का स्वरूप।”
वो थोड़ी देर चुप रही, फिर बोली —
“कभी-कभी भगवान प्रेम को नाम नहीं देते,
क्योंकि नाम सीमाएँ बनाता है।
उनका प्रेम अनंत था —
वो विवाह की परिधि में नहीं, भक्ति की गहराई में था।”
Dilshan धीरे से बोला —
“मतलब वो अलग होकर भी जुड़े रहे?”
Lata (softly):
“हाँ…
जैसे संगीत और शांति — अलग हैं, पर एक-दूसरे को परिभाषित करते हैं।”
Dilshan की आँखों में अभी भी सवाल थे —
“अगर Krishna भगवान थे, तो उन्होंने महाभारत को रोका क्यों नहीं?”
Lata ने हल्के स्वर में कहा —
“क्योंकि वो हमें लड़ना नहीं, समझना सिखाते हैं।
कभी-कभी युद्ध रोकना solution नहीं होता —
उसे समझना होता है कि क्यों शुरू हुआ।”
वो थोड़ी देर रुकी —
“Krishna ने युद्ध करवाया नहीं,
उन्होंने हर व्यक्ति को अपने कर्म का अवसर दिया।
Arjun को सिर्फ रास्ता दिखाया,
कदम तो Arjun ने ही बढ़ाए।”
Dilshan फिर बोला —
“पर अगर वो सब कुछ कर सकते थे,
तो उन्होंने द्रौपदी का अपमान पहले ही क्यों नहीं रोका?
क्यों इंतज़ार किया?”
Lata ने गहरी साँस ली —
उसकी आँखों में एक गंभीर शांति उतर आई।
Lata:
“क्योंकि faith तभी सच्चा होता है
जब वो अंतिम पल में भी डगमगाए नहीं।
Krishna ने द्रौपदी की मदद तब की
जब उसने सब छोड़कर बस ‘उनका नाम’ लिया।
कभी-कभी भगवान हमारी आवाज़ सुनते नहीं —
वो हमारे surrender का इंतज़ार करते हैं।”
Dilshan चुप हो गया —
उसकी आँखों में सवाल कम और समझ ज़्यादा थी।
थोड़ी देर बाद उसने एक और सवाल किया —
“Krishna ने सब कुछ किया, पर फिर भी सबको छोड़ क्यों दिया?
मथुरा, द्वारका… हर जगह वो जाते रहे,
किसी के साथ नहीं रुके।”
Lata की आँखों में हल्की चमक आई —
Lata:
“क्योंकि Krishna आसक्ति के नहीं, जागृति के प्रतीक हैं।
वो किसी के साथ बंधे नहीं,
हर किसी के भीतर बसे हुए हैं।
उनका जाना हमेशा अंत नहीं था,
वो हर बार किसी और रूप में लौटते हैं —
कभी flute की धुन बनकर,
कभी किसी की समझ बनकर।”
Dilshan कुछ पल चुप रहा।
हवा में घंटियों की आवाज़ गूंज रही थी।
Dilshan:
“मतलब Krishna हर किसी के अंदर हैं?”
Lata (धीरे से):
“हाँ… बस हमें सुनना आना चाहिए।
वो कभी temple में नहीं,
हमारे decisions में प्रकट होते हैं —
जब हम सही करने की हिम्मत जुटाते हैं।”
शाम को Dilshan, Lata के साथ उसी Radha–Krishna mandir पहुँचा।
मंदिर का आँगन सुनहरी रोशनी से भरा था,
दीये टिमटिमा रहे थे,
और हवा में चंदन और मोगरे की खुशबू।
Lata ने हाथ जोड़कर आँखें बंद कीं।
Krishna की मूर्ति के सामने रखी मुरली पर फूल गिरे हुए थे —
जैसे भक्ति और सुंदरता दोनों झुक गए हों।
Dilshan ने उसे देखा —
उसके चेहरे की शांति में उसे Radha की झलक लगी।
Lata (धीरे से):
“देख, Krishna मुस्कुरा रहे हैं…
क्योंकि जब कोई सच्चे मन से प्रश्न करता है,
तो वो उत्तर देने में देर नहीं करते।”
Dilshan:
“और जब कोई उन्हें इतनी खूबसूरती से समझाए…
तो शायद वो और ज़ोर से मुस्कुराते हैं।”
Lata ने हल्का blush किया,
पर उसकी आँखों में उस पल एक दिव्यता चमक उठी —
जैसे विश्वास खुद बोल उठा हो।
मंदिर की घंटियों के बीच दोनों चुप खड़े थे —
पर वो silence खाली नहीं था —
वो भरा था faith, warmth और understanding से।
Dilshan ने महसूस किया —
Lata सिर्फ उसकी friend नहीं रही,
वो अब उसकी spiritual teacher बन चुकी थी।
उस रात उसकी diary में एक line लिखी थी —
“कभी-कभी भगवान जवाब नहीं देते,
बल्कि किसी के ज़रिए हमें समझाते हैं।”
“और शायद आज,
Krishna ने मुझे Lata के ज़रिए जवाब दिया।”
👉[जारी है…]
Stay tuned for Part 8 of "Unspoken Bond" —
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।
❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।
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