Unspoken Bond Part 9 : The Last Smile
Welcome to my story blog!
This is Part 9 of an original Hindi story, titled:
Unspoken Bond
Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.
If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.
Thank you for reading. Feel free to share your thoughts in the comments.
🌙 Part 9 – “आख़िरी मुस्कान (The Last Smile)”
Dilshan अब library में अकेला नहीं पढ़ता था।
हर किताब के बीच में उसे Lata की handwriting, उसके छोटे notes याद आते —
"Don’t overthink, Mr. Researcher!"
वो नोट्स अब उसके लिए दुआ बन गए थे।
कभी वो उसके लिए गर्म coffee लाता,
तो कभी उसकी favorite chocolate quietly उसके bag में रख देता।
Lata हर बार मुस्कुरा देती —
“तू हर बार mind पढ़ लेता है क्या?”
Dilshan हल्के से कहता —
“तेरा mind नहीं, दिल पढ़ना सीख गया हूँ।”
Lata अब जल्दी थक जाती थी।
Dilshan ने उसका schedule संभाल लिया था —
library के notes, doctor appointments, medicines तक।
वो हर दिन उसे message करता —
"आज की दवा ली या फिर बहाना तैयार है?"
Lata हँस देती —
“Tera tone अब doctor से भी ज़्यादा strict है।”
एक दिन campus garden में Lata का scarf उड़ गया,
Dilshan ने दौड़कर पकड़ लिया।
वो उसे पहनाते हुए बोला —
“अब हवा को भी तुझे छूने की permission लेनी होगी।”
Lata blush करते हुए बोली —
“तू romantic भी बन गया है।”
Dilshan मुस्कुराया —
“तेरी company में और option है भी क्या।”
एक शाम दोनों फिर उसी Radha–Krishna मंदिर गए।
मंदिर के आँगन में तुलसी की सुगंध, घंटियों की मधुर ध्वनि,
और हवा में बिखरी शांति — जैसे वक़्त ठहर गया हो।
Lata ने धीरे से कहा —
“Dilshan, जानता है क्यों मुझे यहाँ शांति मिलती है?
क्योंकि यहाँ प्रेम का मतलब ‘साथ रहना’ नहीं — ‘समझना’ है।”
Dilshan ने धीरे से उसका हाथ थामा —
“तो अब मैं समझ गया… तू राधा है —
और मैं बस कृष्ण की तरह सीख रहा हूँ, प्रेम निभाने का असली अर्थ।”
Lata की आँखें नम हुईं,
पर मुस्कान वही पुरानी थी —
जिसमें दर्द भी था, और अपनापन भी।
कुछ दिनों बाद Lata hospital में थी।
Dilshan रोज़ आता — उसकी किताबें, उसके headphones,
यहाँ तक कि temple से लाया हुआ छोटा-सा peacock feather भी साथ रखता।
एक रात उसने softly पूछा —
“तू डरती नहीं?”
Lata ने उसकी आँखों में देखा —
“नहीं… क्योंकि तू डरने नहीं देता।”
वो हल्के से उसका माथा सहलाने लगा —
“अब से तुझे कोई pain नहीं होगा, okay?”
Lata ने मुस्कुराकर कहा —
“तू painkiller से ज़्यादा असरदार है।”
उस रात Dilshan ने उसका laptop खोला —
letter खुला था, और उसमें लिखा था:
“प्रिय Dilshan,
अगर मैं नहीं रहूँ तो मेरी हँसी को याद रखना,
वो तेरे लिए ही थी।
तू मेरी कहानी का सबसे सच्चा हिस्सा है।
कभी मेरी याद आए तो आसमान की तरफ देख लेना,
वहाँ एक तारा extra चमक रहा होगा — वही मैं हूँ।”
Dilshan की आँखों से आँसू गिर पड़े,
पर उसके होंठों पर वही हल्की मुस्कान थी —
जैसे Lata अब भी पास हो।
कुछ हफ्तों बाद, Dilshan उसी rooftop पर गया।
हवा वही थी, आसमान वैसा ही।
उसने अपनी notebook खोली —
पहला पन्ना लिखा था:
“कहानी खत्म नहीं हुई… बस अमर हो गई।”
उसने आसमान की ओर देखा —
“Lata, तूने सिखाया था न… हर पल को जीना।”
फिर हल्के से बोला —
“अब मैं जीऊँगा, तेरी हँसी के लिए।”
Campus में वो वही spots पर जाता जहाँ Lata हमेशा साथ रहती थी —
library table, rooftop, और वो old tree।
Dilshan softly बोलता हुआ महसूस करता था —
“हर joke, हर philosophy, हर encouragement…
अब मैं खुद पर विश्वास करूँगा।
तू मेरी strength है, Lata… हमेशा रहेगी।”
Dilshan अब class में confident बोलने लगा।
न सिर्फ अपनी growth, बल्कि उसने दूसरों की भी मदद करना शुरू किया।
New students के nervous moments में वह उन्हें हँसाता, guide करता,
और उन्हें confidence देता।
Dilshan internally सोचता था —
“ये वही तरीका है, जिससे Lata हमेशा मुझे support करती थी।
अब मैं दूसरों में वही support फैलाऊँगा।”
एक दिन Dilshan library में बैठा Lata की diary खोलकर softly बोला —
“Lata… तू चली गई, लेकिन तू मेरी दुनिया में हमेशा जी रही है।
मैं हर day, हर laugh, और हर challenge में तुझे याद रखूँगा।
तेरी philosophy मेरी life की guiding light है।
और तेरी हँसी… हमेशा मेरे साथ रहेगी।”
वो बाहर देखता है — sunset की हल्की light campus पर गिर रही है।
Dilshan को लगता है कि Lata उसके पास है —
visible नहीं, पर महसूस होने वाली, हर जगह।
Part 9 का अंत:
Lata physical world में नहीं थी,
लेकिन उसकी हँसी, philosophy और teachings Dilshan के साथ जी रही थीं।
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