Chapter 4 : जंगल की कसम
Welcome on my story blog!
This is Part 4 of an original Hindi story, titled:
Twaif
Told in weekly parts, this story explores horror, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.
If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.
Thank you for reading. Feel free to share your thoughts in the comments.
Part 3 you can read here for recape...
🌙 Chapter 4 – जंगल की कसम
जंगल की हवा अचानक भारी हो गई थी।
Devans के कानों में अब भी वही अनजानी, डरावनी साँस गूंज रही थी।
उसकी उँगलियाँ ठंडी पड़ गई थीं, पर Aarvi का हाथ उसे कसकर पकड़े हुए था—
जैसे सदियों बाद उसने उसे पाया हो,
और अब खोने से डरती हो।
Devans धीमे से बोला—
“ये… क्या सच में वही लोग हैं?”
Aaarvi ने उसकी आँखों में झाँका।
उसका चेहरा शांत था,
पर उसकी साँसें गहरी थीं—
जैसे वो कोई ऐसा सच छुपा रही हो
जिसे बताने से रात और भी काली हो जाएगी।
“हाँ,” उसने फुसफुसाया,
“ये वही हैं… जिन्हें मैं मरने के बाद भी जीने नहीं दे सकी।”
Devans का दिल धड़कना भूल गया।
उसने पूछा—
“पर तुमने किया क्या…?”
Aarvi ने धीरे से कहा—
“न्याय।”
रात गहराती जा रही थी।
चांद बादलों में खो गया था।
जंगल के पेड़ ऐसे खड़े थे,
मानो सदियों से किसी इंतज़ार में जमे हों।
Aarvi, Devans को लेकर एक पुरानी, टूटी हुई पगडंडी की ओर बढ़ी।
उसके कदम भारी थे—
जैसे वो जगह उसे याद हो।
जैसे वहाँ कोई कहानी अधूरी पड़ी हो।
Devans बोला—
“हम यहाँ क्यों आ रहे हैं?”
Aarvi रुक गई।
धीरे से मुड़कर बोली—
“क्योंकि यही वो जगह है
जहाँ पहली बार मुझे एहसास हुआ था
कि justice और revenge
दो अलग चीज़ें नहीं हैं।”
Devans की रीढ़ में सिहरन दौड़ गई।
लेकिन वो उसके साथ चल रहा था—
किसी खिंचाव के कारण,
जिसे वो समझ नहीं पा रहा था।
अचानक एक सूखी डाल टूटने की आवाज़ आई।
Devans ने पीछे मुड़कर देखा—
कुछ नहीं।
पर Aarvi की आवाज़ ठंडी हो गई—
“वो आ गए…”
Devans ने डरकर पूछा—
“कौन?”
Aarvi ने हवा में देखते हुए कहा—
“पहला…
ज़मींदार का छोटा भाई।”
जैसे ही उसने नाम लिया,
हवा और ठंडी हो गई।
एक काली-सी धुंध जमा होने लगी।
घास अपने आप दबने लगी—
जैसे कोई कदम रख रहा हो।
Devans ने हवा में परछाईं-सी देखी।
बिना चेहरा, बिना शरीर—
सिर्फ़ नफ़रत।
Aarvi धीमे से बोली—
“पहले उसने मुझे चूमा था…
फिर मेरे कपड़े फाड़े थे…”
Devans का पूरा शरीर सख्त हो गया।
Aarvi आगे बोली—
“लेकिन आज…
मैं अकेली नहीं हूँ।”
उसकी आँखें आग की तरह चमकीं।
धुंध चीख़कर पीछे हट गई—
और पेड़ों के बीच गायब हो गई।
Devans ने आश्चर्य से पूछा—
“ये… तुमने कैसे किया?”
Aarvi ठंडी आवाज़ में बोली—
“मैं ज़िंदा नहीं हूँ, Devans…
मैं किसी शरीर की तरह कमजोर नहीं हूँ।
मैं उनकी चीखों से बनी हूँ।”
Devans डर और उलझन से भर गया।
वो Aarvi से दूर हट गया।
“अगर तुम इतनी शक्तिशाली हो…
तो मुझे क्यों चाहिए?”
Aarvi ने कदम बढ़ाए।
उसका चेहरा दुख और क्रोध से काँप रहा था।
“क्योंकि तू मेरा हिस्सा है…
तेरे बिना मैं अपूर्ण हूँ।
तेरी आत्मा मेरी है।”
Devans को लगा जैसे कोई अनदेखा हाथ
उसके दिल को जकड़ रहा हो।
“अगर मैं Amit हूँ…
तो तुम्हें क्या चाहिए मुझसे?”
Aarvi की आवाज़ सदियों पुराने दर्द में टूट गई—
“मुक्ति।”
“तुम्हारी?”
Aarvi ने धीरे-धीरे सिर हिलाया—
“नहीं…
हम दोनों की।”
अचानक पेड़ों की कतारों में से
सैकड़ों आँखें चमकने लगीं—
लाल, नीली, सफ़ेद…
सब मृत,
पर सब जागती हुईं।
Devans का दिल जम गया।
“ये… सब कौन हैं?”
Aarvi बोली—
“जिन्हें तू नहीं जानता…
पर मैं जानती हूँ।
क्योंकि इन्हें मैंने खुद बुलाया है।”
Devans घबरा गया—
“क्यों…?”
Aarvi उसके बेहद करीब आई।
उसकी ठंडी उँगलियाँ Devans की गर्दन पर फिसलीं—
एक अजीब-सी पहचान
उसके भीतर दहक उठी।
“क्योंकि मुक्ति एक जैसी नहीं मिलती, Devans…
किसी को भटके हुए को बचाकर मिलती है,
और किसी को…
भटके हुए को अपने पास रखकर।”
Devans हकलाया—
“मतलब…?”
Aarvi ने फुसफुसाया—
“तू मरकर ही मेरा होगा।”
अचानक पीछे से किसी ने Devans का नाम पुकारा—
एक पुरुष की भारी आवाज़।
Devans ने पलटकर देखा—
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
फिर वो आवाज़ दोबारा आई—
और इस बार इतनी साफ़…
कि उसका दिल बैठ गया—
“Amit…”
Devans की साँस रुक गई।
उस आवाज़ में वही कड़वाहट, वही ज़हर था—
जो शायद उसकी मौत की वजह था।
Aarvi ने धीरे से कहा—
“जंगल अब जाग गया है…
और तुम्हारे अतीत ने तुम्हें पहचान लिया है।”
और फिर—
पेड़ों की छाया से कोई परछाईं बाहर आई…
👉[जारी है…]
Stay tuned for Part 5 of "Twaif" —
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।
❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।
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