Dosti (दोस्ती ) Part -2 : कॉलेज के दिन

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This is the beginning of an original Hindi love story, titled:

Dosti (दोस्ती )

Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love &  caring, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.

If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.

You can read part 1 here : Part 1

This is Part Two. Thank you for reading, and feel free to share your thoughts in the comments.

Dosti (दोस्ती )

Part 2:  कॉलेज के दिन

स्कूल की मासूम गलियों से निकलकर जब Rekha और Radha ने कॉलेज की चौखट पर कदम रखा, तो ऐसा लगा मानो ज़िंदगी ने एक नया अध्याय खोल दिया हो।



अब उनके सामने सिर्फ़ किताबें नहीं थीं...

बल्कि assignments, projects, presentations, career के सपने और भविष्य की अनगिनत उम्मीदें भी थीं।

लेकिन इन सबके बीच एक चीज़ बिल्कुल नहीं बदली थी—

उनकी दोस्ती।

Radha आज भी पहले जैसी ही थी...

बिंदास, बेफिक्र और शरारतों से भरी हुई।

Lecture शुरू होते ही उसका ध्यान ब्लैकबोर्ड से ज़्यादा खिड़की के बाहर उड़ते पंछियों और कैंटीन की ओर चला जाता।



वो धीरे से Rekha की कुहनी में कुहनी मारते हुए फुसफुसाती—

"Rekha.. ये sir का lecture सुनते-सुनते तो नींद आ जाएगी। चल ना... canteen चलते हैं।"

Rekha बिना नज़र उठाए अपनी notebook में लिखती रहती और हल्की-सी मुस्कान के साथ कहती—

"पहले notes पूरे कर ले। Exam में fail हो गई ना... तो वही canteen भी अच्छी नहीं लगेगी।"

Radha तुरंत मुँह बनाकर बोलती—

"तू ना... दोस्त कम और teacher ज़्यादा लगती है। तेरे साथ bunk करने का भी कोई मज़ा नहीं।"

Rekha हँस पड़ी।

"किसी एक को तो responsible बनना पड़ेगा... वरना तेरी मम्मी मुझे ही डाँटेंगी।"

दोनों की धीमी-धीमी हँसी पूरी बेंच तक फैल जाती।


📚 लाइब्रेरी की ख़ामोशियाँ

कॉलेज की विशाल लाइब्रेरी में हमेशा सन्नाटा पसरा रहता था।

लेकिन उस सन्नाटे के बीच एक कोना ऐसा था जहाँ दोस्ती की सबसे खूबसूरत तस्वीर दिखाई देती थी।

Rekha किताबों और नोट्स में पूरी तरह खोई रहती...

और उसके ठीक सामने बैठी Radha अपनी कॉपी के आख़िरी पन्नों पर रंग-बिरंगे doodles और छोटी-छोटी cartoons बनाती रहती।



एक दिन Rekha ने उसकी कॉपी देखी और मुस्कुराते हुए बोली—

"Madam Artist... पहले ये equations solve कर लो, फिर पूरी gallery बना लेना।"

Radha ने शरारती मुस्कान के साथ जवाब दिया—

"इतना maths पढ़कर कौन-सा scientist बनना है? वैसे भी शादी के बाद कौन पूछेगा कि Radha को integration आता है या नहीं?"

इस बार Rekha की मुस्कान हल्की पड़ गई।

उसने शांत लेकिन गंभीर स्वर में कहा—

"ज़िंदगी सिर्फ़ शादी का नाम नहीं होती, Radha... उससे पहले भी एक पहचान होती है। और वो पहचान मेहनत और पढ़ाई से बनती है।"

कुछ पल के लिए Radha बिल्कुल चुप हो गई।

उसे मालूम था...

जब भी Rekha गंभीर होकर कुछ कहती थी, उसके हर शब्द के पीछे सच्चाई होती थी।


🏆 इम्तिहानों का मौसम

कॉलेज में परीक्षा का समय आते ही सबसे ज़्यादा मेहनत शायद Rekha को करनी पड़ती थी।

क्योंकि उसे सिर्फ़ अपनी नहीं...

बल्कि Radha की पढ़ाई की भी पूरी जिम्मेदारी उठानी पड़ती थी।

रात गहराती जाती...

कमरे में सिर्फ़ टेबल लैम्प की हल्की पीली रोशनी जलती रहती...

और Rekha धैर्य से एक-एक chapter समझाती रहती।



कुछ देर बाद Radha किताब बंद करते हुए कहती—

"बस Rekha.. अब दिमाग़ जवाब दे चुका है। इतना कौन याद रखेगा?"

Rekha बिना हार माने कहती—

"बस थोड़ा-सा और... तू revise करती रह। बाकी मैं हूँ ना।"

Exam वाले दिन Radha हमेशा घबरा जाती।

Exam hall के बाहर वो Rekha का हाथ कसकर पकड़ लेती और धीमी आवाज़ में पूछती—

"अगर मैं fail हो गई तो...?"

Rekha मुस्कुराई।



उसने प्यार से उसका हाथ दबाया और बोली—

"तो मैं भी fail हो जाऊँगी। दोस्ती का एक ही नियम होता है... साथ में हँसना और ज़रूरत पड़े तो साथ में रोना भी।"

ये सुनते ही Radha की आँखें हल्की-सी नम हो जातीं।

वो बिना कुछ कहे मुस्कुराती और पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा कक्ष में प्रवेश कर जाती।


🎭 कॉलेज की रंगीन दुनिया

कॉलेज का शायद ही कोई ऐसा कार्यक्रम होता जिसमें Rekha और Radha की जोड़ी न दिखाई देती हो।

Cultural festivals...

Annual functions...

Picnics...

Farewell parties...

हर जगह दोनों साथ नज़र आतीं।

जहाँ Radha अपनी हाज़िरजवाबी और मस्ती से पूरे माहौल में जान डाल देती...

वहीं Rekha हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखती।

उनकी जोड़ी पूरे कॉलेज की पहचान बन चुकी थी।

Teachers भी मुस्कुराकर कहा करते—

"अगर Radha अच्छे नंबरों से पास हो रही है... तो उसके पीछे Rekha की मेहनत है।"

Radha तुरंत हँसते हुए जवाब देती—

"बिल्कुल... मेरी guardian angel जो है!"

Rekha बस मुस्कुरा देती...

लेकिन उसके दिल को यह जानकर सुकून मिलता कि उसकी मेहनत उसकी सबसे प्यारी दोस्त के काम आ रही थी।


💞 दोस्ती... जो हर दिन और गहरी होती गई

देखते ही देखते कॉलेज के तीन साल कब बीत गए...

किसी को पता ही नहीं चला।

इन तीन वर्षों में बहुत कुछ बदला...

क्लासरूम बदले...

Subjects बदले...

सपने बदले...

लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदली—

Rekha और Radha की दोस्ती।

Radha को लगता था कि उसकी ज़िंदगी Rekha के बिना अधूरी है...

और Rekha के लिए Radha सिर्फ़ एक दोस्त नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन चुकी थी।

उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था...

कि किस्मत चुपचाप उनकी ज़िंदगी का अगला पन्ना लिख रही थी।

एक ऐसा पन्ना...

जो उनकी दोस्ती की सबसे कठिन परीक्षा लेने वाला था।


Stay tuned for Part 3 of "Dosti"

जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।

❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।




Comments

  1. Kuch rishte naam se nahi,dil se hote unmai se ek hai dosti❣️

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  2. Dosti sach mein wahi hoti hai, jahan ek dost sirf saath nahi deta, balki doosre dost ki kamiyon ko bhi apni responsibility samajhkar sambhalta hai...❤️
    I really loved the friendship between Rekha and Radha..❤️ 🥹❤️ 🙌 ❤️ 🫶 Ab Part 3 mein kya hone wala hai, iska wait rahega! ✨🙌✌️✌️

    ReplyDelete

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