Dosti (दोस्ती ) Part -3 : नई ज़िंदगी, नई ज़िम्मेदारियाँ
Welcome to my story blog!
This is the beginning of an original Hindi love story, titled:
Dosti (दोस्ती )
Told in weekly parts, this story explores quiet heartbreak, unspoken love & caring, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.
If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.
You can read part 2 here : Part 2
This is Part Three. Thank you for reading, and feel free to share your thoughts in the comments.
Dosti (दोस्ती )
📖 Chapter 3 : नई ज़िंदगी, नई ज़िम्मेदारियाँ
कॉलेज का सफ़र यादों में बदल चुका था।
वो दिन, जब हर सुबह साथ कॉलेज जाना, कैंटीन में घंटों बैठना, लाइब्रेरी की ख़ामोशियों में हँसी बाँटना और इम्तिहानों से पहले रात-रात भर पढ़ाई करना... अब सिर्फ़ खूबसूरत यादें बनकर रह गए थे।
अब ज़िंदगी का एक नया अध्याय शुरू हो चुका था...
ज़िम्मेदारियों का अध्याय।
दोनों सहेलियों के सामने अब सपनों को हकीकत में बदलने की चुनौती थी।
अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर Rekha ने जल्द ही एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी हासिल कर ली।
वहीं Radha के लिए यह सफ़र थोड़ा कठिन रहा।
कई इंटरव्यू...
कई असफलताएँ...
कई निराशाएँ...
लेकिन हर बार जब उसका हौसला टूटने लगता, Rekha उसका हाथ थामकर उसे फिर से खड़ा कर देती।
आख़िरकार, उसकी मेहनत भी रंग लाई और उसे भी एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिल गई।
Radha की माँ की आँखों में आज भी वही अटूट विश्वास था।
वो अक्सर मुस्कुराकर कहतीं—
"जब तक मेरी Rekha, Radha के साथ है... मुझे किसी बात की चिंता नहीं। मेरी बेटी कभी गलत रास्ते पर नहीं जाएगी।"
उनके इन शब्दों में सिर्फ़ भरोसा नहीं...
बल्कि वर्षों से कमाया हुआ विश्वास छिपा था।
🌇 नई दुनिया की शुरुआत
नई नौकरी...
नया शहर...
नए लोग...
नई ज़िम्मेदारियाँ...
Radha के लिए हर दिन किसी नए रोमांच से कम नहीं था।
नौकरी के पहले ही हफ्ते उसने उत्साह से Rekha को फ़ोन लगाया।
Radha: "Rakhi... ऑफिस बहुत शानदार है! सब लोग इतने friendly हैं... और वहाँ की canteen की coffee... uff... amazing!"
दूसरी तरफ़ से Rekha हँस पड़ी।
Rekha: "Coffee की तारीफ़ तो पहले ही कर दी... अब ये भी बता, काम कैसा चल रहा है?"
Radha ने हल्की-सी साँस छोड़ी।
"काम भी अच्छा है... लेकिन honestly, थोड़ा tough लग रहा है।"
Rekha का जवाब हमेशा की तरह शांत और भरोसे से भरा था।
"Tough नहीं है... बस नया है। कुछ दिन में सब आसान लगने लगेगा। बस अपना focus मत खोना।"
Radha को कई बार Rekha की बातें ज़रूरत से ज़्यादा practical लगती थीं...
लेकिन सच यही था...
जब भी वो उलझती, सबसे पहले उसे Rekha की ही बातें याद आती थीं।
🌟 Suresh की एंट्री
समय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया।
एक दिन ऑफिस में एक नया कर्मचारी आया—
Suresh.
शुरुआत में वह अपने काम तक ही सीमित रहता।
कम बोलता...
ज़्यादा मुस्कुराता...
और पूरी ईमानदारी से अपना काम करता।
कुछ ही दिनों में किसी project के दौरान उसकी और Radha की बातचीत शुरू हुई।
Radha का मिलनसार स्वभाव और Suresh की सहजता...
दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होने लगी।
अब lunch breaks साथ बीतने लगे।
Projects साथ बनने लगे।
कभी files share होतीं...
तो कभी jokes...
और देखते ही देखते दोनों ऑफिस के अच्छे दोस्त बन गए।
सहकर्मी भी मज़ाक करने लगे।
"अरे... Radha और Suresh तो आजकल inseparable हो गए हैं!"
कोई हँसते हुए कहता—
"लगते तो भाई-बहन जैसे ही हैं।"
Radha भी मुस्कुराकर जवाब देती—
"हाँ... बिल्कुल! हम भी एक-दूसरे को भाई-बहन जैसा ही मानते हैं।"
सब हँस देते...
लेकिन हर ऑफिस की तरह यहाँ भी कुछ लोगों का सबसे पसंदीदा काम था—
दूसरों की ज़िंदगी पर कहानियाँ गढ़ना।
और अफ़वाहों की शुरुआत हमेशा मुस्कुराहटों से ही होती है।
📞 एक बातचीत... जिसने Rekha को सोचने पर मजबूर कर दिया
एक शाम दोनों सहेलियाँ रोज़ की तरह फ़ोन पर बातें कर रही थीं।
इधर-उधर की बातों के बीच Radha ने सहजता से कहा—
"आज Suresh ने मेरी बहुत मदद की। Presentation में कई गलतियाँ थीं... उसने सब ठीक कर दिया। सच में, बहुत अच्छा लड़का है।"
Rekha कुछ पल चुप रही।
फिर शांत स्वर में बोली—
"अच्छा है... दोस्ती रखना गलत नहीं है। लेकिन एक बात हमेशा याद रखना... ऑफिस में लोग काम से ज़्यादा लोगों की बातें करते हैं।"
Radha हल्का-सा झुंझलाई।
"अरे Rakhi... हम तो भाई-बहन की तरह हैं। लोगों का काम ही gossip करना है।"
Rekha ने धीरे से कहा—
"मुझे तुम पर भरोसा है, Radha... लेकिन दुनिया हमेशा भरोसे से नहीं चलती। कभी-कभी सिर्फ़ दिखने वाली चीज़ों पर फैसले सुना दिए जाते हैं। इसलिए बस थोड़ा सावधान रहना।"
Radha ने हँसते हुए बात वहीं खत्म कर दी।
उसे लगा...
Rekha हमेशा की तरह ज़रूरत से ज़्यादा सोच रही है।
लेकिन फ़ोन रखने के बाद...
Rekha के मन में एक अनजानी बेचैनी जन्म ले चुकी थी।
एक ऐसी बेचैनी...
जिसका कारण वह खुद भी समझ नहीं पा रही थी।
👩👧 एक माँ का अटूट विश्वास
जब भी Radha की माँ, Rekha से मिलतीं...
उनके चेहरे पर वही स्नेह और वही विश्वास झलकता।
वो हमेशा कहतीं—
"बेटा... मेरी Radha का ध्यान रखना। उम्र भले बढ़ गई हो, लेकिन समझदारी के मामले में आज भी मुझे सबसे ज़्यादा भरोसा तुम पर ही है।"
Rekha हर बार मुस्कुराकर सिर हिला देती।
वो दिल से चाहती थी कि Radha की ज़िंदगी हमेशा खुशियों से भरी रहे।
लेकिन धीरे-धीरे उसे महसूस होने लगा...
कि समय के साथ Radha बदल रही है।
अब हर छोटी-बड़ी बात सबसे पहले Rekha तक नहीं पहुँचती थी।
कुछ बातें...
कुछ मुलाक़ातें...
कुछ एहसास...
Radha अपने तक ही रखने लगी थी।
⚡ दोस्ती की पहली परीक्षा
दिन बीतते गए...
और Suresh तथा Radha की दोस्ती पहले से कहीं अधिक मज़बूत होती चली गई।
अब सिर्फ़ ऑफिस ही नहीं...
ऑफिस के बाद भी घंटों फ़ोन पर बातें होने लगीं।
कभी किसी project के बहाने...
तो कभी बिना किसी वजह के।
धीरे-धीरे Rekha ने महसूस किया...
कि Radha उससे कुछ बातें छिपाने लगी है।
उसके मन में एक सवाल बार-बार उठता—
"क्या सचमुच अब Radha को मेरी उतनी ज़रूरत नहीं रही...?"
लेकिन अगले ही पल उसका दिल जवाब देता—
"अगर उसे मेरी ज़रूरत नहीं भी रही... तो क्या मैं उसे अकेला छोड़ सकती हूँ?"
यही वह पल था...
जहाँ से उनकी कहानी ने एक नया मोड़ लिया।
एक ऐसा मोड़...
जहाँ दोस्ती, भरोसे और रिश्तों की असली परीक्षा शुरू होने वाली थी।
Stay tuned for Part 4 of Dosti......
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।
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Kabhi-kabhi do doston ke beech kisi teesre ke aa jaane se rishta badal jaata hai….💔 Galatfahmiyan badh jaati hain aur jo dosti kabhi sabse khaas thi, wahi dheere-dheere dooriyon mein badalne lagti hai....🥺❤️🩹
ReplyDeleteAb bas intezar hai next part ka.… dekhte hain ye dosti bachegi ya kisi teesre ki wajah se hamesha ke liye badal jaayegi.... 🥺✨