Chapter 6 : Aarvi ने पुराने Devans (Amit) को क्यों मारा?

 Welcome on my story blog!

This is Part 6 of an original Hindi story, titled:

Twaif

Told in weekly parts, this story explores horror, unspoken love, and the kind of connection that lingers even after it’s gone.

If you’ve ever loved deeply — or lost without closure — I hope this story finds you.

Thank you for reading. Feel free to share your thoughts in the comments.

Part 5, you can read here for a recap... 

Part 5


Chapter 6 : Aarvi ने पुराने Devans (Amit) को क्यों मारा?

“सच हमेशा वही नहीं होता, जो सुनाई देता है…”

जंगल में हवा रुकी हुई थी।
Amit की सड़ी हुई परछाईं Devans को घूर रही थी—
ठंडी, गहरी नफरत के साथ।



Devans काँपती आवाज़ में बोला—
“तुम कह रहे हो… Aarvi ने तुम्हें मारा?”

Amit की आँखों में अंधेरा उमड़ आया।
उसने गर्दन तिरछी करते हुए कहा—



“हाँ…
मेरी मौत उसी की वजह से हुई।”

Aarvi चीख उठी—
“झूठ! Devans, इस पर भरोसा मत करना—”



Amit ने चीखकर कहा—
“सच जानना चाहता है?
तो सुन…”

धरती अचानक काँपने लगी।
पेड़ों की शाख़ें झुक गईं—
मानो अतीत अपने घाव खोल रहा हो।



Amit बोला—

“मैं Aarvi से प्यार करता था…
लेकिन उसने मुझे प्यार से नहीं,
डर से मारा।”

Devans का दिल जैसे पत्थर हो गया।



Aarvi रोकर बोली—
“नहीं… Amit… मत कहो…
ये आधा सच है।”

Amit ने उसे काट दिया—

“उस रात… भीड़ हमें मारने आई थी।
मैंने उसकी जान बचाई।
उसे अपने पीछे छुपाया…”

Devans की साँसें अटक गईं।
Amit आगे बोला—

“फिर मैंने Aarvi से कहा—
‘भाग जाओ। मैं उन्हें रोक लूँगा।’
पर वो नहीं मानी।
वो मुझे अपनी आँखों के सामने मरते नहीं देख सकती थी।”

उसकी आवाज़ फट गई—

“तो उसने…
मुझे ही मार दिया।”

Devans स्तब्ध—
“क्यों!?”



Amit की आवाज़ टूटी,
पर उसमें अभी भी नफरत जमकर थी—

“क्योंकि वो जानती थी…
अगर मैं जिंदा रहता,
तो भीड़ मुझे मार देती—
और उसे फिर उसी नर्क में वापस जाना पड़ता…”

Aarvi की आँखों से आँसू बहते रहे।
उसने कहा—

“Devans…
मैंने Amit को मौत से नहीं,
ज़िंदगी से बचाया था…
उसकी मौत जल्दी और बिना तकलीफ़ हो—
बस यही चाहा था।”



Amit चीखा—
“झूठ!”

Aarvi टूटकर चिल्लाई—

“तू जानता है Amit!
तेरी साँसें टूट रही थीं…
तेरी हड्डियाँ crushed थीं…
तू जी नहीं रहा था—तड़प रहा था!”

जंगल अचानक शांत हो गया।
जैसे पेड़ों की आत्माएँ इस सच पर थम गई हों।



Aarvi ने धीमे से कहा—

“उस रात…
भीड़ के जाने के बाद
मैंने तुझे अपनी गोद में लिया था।
तू रो रहा था… दर्द से, चीख से…
तूने मुझसे कहा था—
‘Aarvi… मुझे दर्द मत सहने देना…’”

Devans की आँखें नम हो गईं।

Amit की परछाईं काँप उठी।

Aarvi की फुसफुसाहट टूटी—

“तो मैंने…
तुझे अपनी ही चाकू से मुक्ति दी।”

Devans मौन।
Amit की परछाईं पीछे हटी—
उसका गुस्सा… उसकी नफरत…
धीरे-धीरे पिघलती हुई।

“मैंने तुझे मारा नहीं था, Amit…
तेरी आख़िरी इच्छा पूरी की थी।”

Amit की आवाज़ पहली बार—
मानवीय हुई—

“…तो मैं नफरत लेकर क्यों लौटा?”

Aarvi बोली—

“क्योंकि सुकून कभी किसी की मौत से नहीं,
सच से मिलता है।
और सच तुझे बताया ही नहीं गया।”

जंगल हल्का-सा चमक उठा,
जैसे कोई भारी ताला खुल गया हो।

Devans ने पूछा—

“तो अब क्या होगा…?”

Amit ने Devans की ओर देखा—
उसकी आँखों का अंधेरा मिटता हुआ।

“अब…
मुझे पहली बार समझ आया है
कि मैं क्यों भटक रहा था।”

Aarvi का चेहरा—
डर और उम्मीद से भरा हुआ।

Amit ने कहा—

“क्योंकि मेरा एक हिस्सा…
अब भी अधूरा है।”

Devans ने धीरे से पूछा—

“कौन-सा हिस्सा?”

Amit ने अपना हाथ उठाया
और सीधे Devans की ओर इशारा किया—

“तू।”



एक मौत समझ में आ गई… पर असली डर तो अब शुरू हुआ था।

Amit की आत्मा को सुकून मिल गया था—पर Devans की बर्बादी की शुरुआत।

सवाल ये नहीं कि Amit क्यों मरा—

सवाल ये है कि ‘किसके लिए’ वापस आया?

Aarvi ने Amit को बचाया था…
अब Devans को कौन बचाएगा?


👉[जारी है…]

Stay tuned for Part 7 of "Twaif" —
जल्द आ रहा है… एक और शाम, एक और सच्चाई।

❤️ अगर कहानी पसंद आई हो, तो कमेंट ज़रूर करें। आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है।

Comments

Popular posts from this blog

Bas Itna Hi Tha (बस इतना ही था) Part - 1 (Love Story )

Unspoken Bond Part 1 : लेक्चर हॉल की टेंशन

Twaif Chapter 1: The Jungle Night